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विश्व पृथ्वी दिवस(२२अप्रैल)

विश्व पृथ्वी दिवस(२२अप्रैल)————–
       वृक्ष    धरा   का  हैं    श्रंगार।   इनसे  करो  सदा  तुम  प्यार।।
      इनकी  रक्षा    धर्म     तुम्हारा। ये  है  जीवन  का  आधार।।

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भाईचारा , आस्तिकता , तथा प्रेम-मिलन का प्रतीक होली के पर्व पर आप सभी को शुभकामना।

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सत्य विचार—————

सत्य विचार—————
१=कवि वह सपेरा है जिसकी पिटारी में साँपों के स्थान पर ह्रदय बन्द होते हैं।
२= सच्चा प्रेम संयोग में भी वियोग की मधुर वेदना का अनुभव करता है।

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कुछ चुनाव-चिन्हों पर पहेलियाँ———

कुछ चुनाव-चिन्हों पर पहेलियाँ———
हाथी=== काला है पर काग नहीं , कहें नाग पर सांप नहीं। एक हाथ पर पैर चार , बतलाओ कर सोच-विचार।।
कमल=== पेट फोड़ा तो कल , सिर तोड़ा तो मल ।पांव टूटे तो कम ,हँसता है हरदम।।
साइकिल======= तन लोहे का पांव रबर के , उसे चलाते हैं दम भरके।।
तराजू======== पूँछ पीठ पर टांगें आठ , ढोती माल उठाती बाट।।

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सूक्ति (वोट )–सदा एक सिद्धान्त के लिए वोट दो।चाहे तुम अकेले ही वोट दो और तब तुम्हें इस मधुर विचार का आनन्द मिलेगा कि तुम्हारा वोट कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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सूक्ति (वोट)

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गज़लों के राजा (सुपर गायक जगजीत सिंह जी ) को मेरा सलाम।

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बसंत पंचमी

यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का सूचक समझा जाता है। वसंत ऋतुओं का राजा माना जाता है। माघ शुक्ला पंचमी को यह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन सरस्वती जी उत्पन्न हुई थी ,इसी कारण इसे सरस्वती जयन्ती भी कहते हैं। इस दिन कवि नए छन्दों की रचना करते हैं। कलाकार नया खेल भी मंच पर उपस्थित करते हैं। इस दिन सभी पीले वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन आम के बौर देखने का बड़ा महत्व होता है। वृक्षों में नई-नई कोपलें फूटती हैं। बाग-बगीचों में अपूर्व लावण्य छिटकने लगता है। पक्षियों का कलरव मन को बरबस अपनी ओर खींचने लगता है। इस दिन कामदेव और रति की पूजा भी होती है। बसंत कामदेव का सहचर है। इस दिन किसान लोग अपने खेतों से नया अन्न लाकर उसमें घी-मीठा मिलाकर उसे अग्नि को ,पितरों को और देवों को अर्पण करते हैं। नया अन्न खाते हैं। इस प्रकार बसंत पंचमी हमारा सामाजिक त्यौहार है जो हमारे आनन्दोल्लास का प्रतीक है।सभी कोबसंत पंचमी पे बधाई।

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सुविचार———-

सुविचार———-
१= निश्चय पूर्वक विवेक कीजिए।विकासपूर्वक विस्तार कीजिए।जिज्ञासा पूर्वक अनुसंधान कीजिए।
२= आपकी आँखों में करुणा , वाणी में माधुर्य , और हाथों में कोमलता होनी चाहिए।
३= अत्याचारों के समक्ष कभी नतमस्तक नहीं होना चाहिए।
४= भ्रष्टाचार व अन्य सामाजिक बुराईयों को कभी आश्रय न दें।

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गणतंत्र दिवस(छब्बीस जनवरी)

छब्बीस जनवरी आकर कहती हर बार, संघर्षों से ही मिलता है जीने का अधिकार।।
स्वतंत्रता वरदान है और परतंत्रता अभिशाप।भारत देश को भी शताब्दियों तक पराधीनता का अभिशाप सहन करना पड़ा। भारत क्वतंत्र तो हो गया पर उसका कोई अपना संविधान नहीं था। सन१९५० में देश के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा नया संविधान बनने पर २६जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। गणतंत्र का अर्थ है सामुदायिक व्यवस्था।
आज संपूर्ण विश्व में हिंसा , द्वेश , प्रतिहिंसा , और अपहरण तथा शोषण की भावना नेण घर कर लिया है। हमारे देश के गणतंत्र ने इन दूषित एवं कुत्सित भावनाओं से पृथक रहकर अहिंसा , प्रेम , समानता और भाईचारे को ही अपनाया है। इसमें सन्देह नही कि इस समय हमारे गणतंत्र के अने क कठिनाईयां हैं ,किन्तु जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि हमारा राष्ट्र एक दिन विश्व में अवश्य अग्रणी होगा ।
शिवमंगल सिंह ‘सुमन ‘ने पिंजरे में बन्द पक्षी के माध्यम से पराधिनता के उत्पीड़न को प्रकट करते हुए कहा है———– नीड़ न दो चाहे टहनी का , आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।।
२६ जनवरी पर आप सभी को ढेर सारी बधाईयां।

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