Archive for जनवरी, 2012

बसंत पंचमी

यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का सूचक समझा जाता है। वसंत ऋतुओं का राजा माना जाता है। माघ शुक्ला पंचमी को यह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन सरस्वती जी उत्पन्न हुई थी ,इसी कारण इसे सरस्वती जयन्ती भी कहते हैं। इस दिन कवि नए छन्दों की रचना करते हैं। कलाकार नया खेल भी मंच पर उपस्थित करते हैं। इस दिन सभी पीले वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन आम के बौर देखने का बड़ा महत्व होता है। वृक्षों में नई-नई कोपलें फूटती हैं। बाग-बगीचों में अपूर्व लावण्य छिटकने लगता है। पक्षियों का कलरव मन को बरबस अपनी ओर खींचने लगता है। इस दिन कामदेव और रति की पूजा भी होती है। बसंत कामदेव का सहचर है। इस दिन किसान लोग अपने खेतों से नया अन्न लाकर उसमें घी-मीठा मिलाकर उसे अग्नि को ,पितरों को और देवों को अर्पण करते हैं। नया अन्न खाते हैं। इस प्रकार बसंत पंचमी हमारा सामाजिक त्यौहार है जो हमारे आनन्दोल्लास का प्रतीक है।सभी कोबसंत पंचमी पे बधाई।

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सुविचार———-

सुविचार———-
१= निश्चय पूर्वक विवेक कीजिए।विकासपूर्वक विस्तार कीजिए।जिज्ञासा पूर्वक अनुसंधान कीजिए।
२= आपकी आँखों में करुणा , वाणी में माधुर्य , और हाथों में कोमलता होनी चाहिए।
३= अत्याचारों के समक्ष कभी नतमस्तक नहीं होना चाहिए।
४= भ्रष्टाचार व अन्य सामाजिक बुराईयों को कभी आश्रय न दें।

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गणतंत्र दिवस(छब्बीस जनवरी)

छब्बीस जनवरी आकर कहती हर बार, संघर्षों से ही मिलता है जीने का अधिकार।।
स्वतंत्रता वरदान है और परतंत्रता अभिशाप।भारत देश को भी शताब्दियों तक पराधीनता का अभिशाप सहन करना पड़ा। भारत क्वतंत्र तो हो गया पर उसका कोई अपना संविधान नहीं था। सन१९५० में देश के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा नया संविधान बनने पर २६जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। गणतंत्र का अर्थ है सामुदायिक व्यवस्था।
आज संपूर्ण विश्व में हिंसा , द्वेश , प्रतिहिंसा , और अपहरण तथा शोषण की भावना नेण घर कर लिया है। हमारे देश के गणतंत्र ने इन दूषित एवं कुत्सित भावनाओं से पृथक रहकर अहिंसा , प्रेम , समानता और भाईचारे को ही अपनाया है। इसमें सन्देह नही कि इस समय हमारे गणतंत्र के अने क कठिनाईयां हैं ,किन्तु जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि हमारा राष्ट्र एक दिन विश्व में अवश्य अग्रणी होगा ।
शिवमंगल सिंह ‘सुमन ‘ने पिंजरे में बन्द पक्षी के माध्यम से पराधिनता के उत्पीड़न को प्रकट करते हुए कहा है———– नीड़ न दो चाहे टहनी का , आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।।
२६ जनवरी पर आप सभी को ढेर सारी बधाईयां।

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मकर संक्रान्ति

मकर संक्रान्ति -भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य की बारह राशियाँ मानी गई हैं।जब सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है तब ‘मकर संक्रान्ति’ होती है। मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरायण और कर्क संक्रान्ति से सूर्यदक्षिणायन हो जाता है।उत्तरायण में दिन बड़ा होता है, रात छोटी और दक्षिणायन में रात बढ़ी और दिन छोटा होता है कहा जाता है कि इस दिन यशोदा जी ने कृष्ण के जन्म केलिए व्रत रखा था। यह प्रतिवर्ष १४ जनवरी को होती है।इस दिन गंगा- यमुना स्नान का बड़ा महत्व है। मकर संक्रान्ति के दिन खिचड़ी और तिल के बने लड्डू गरीब ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। महाराष्ट्र में विवाहित लड़किया ंइस दिन तेल , कपास , नमक आदि सौभाग्यवती स्त्रियों को देती हैं। बंगाल में भी स्नान और तिल दान की प्रथा है। गंगा सागर में इस दिन बड़ा भारी मेला लगता है। इस महीने में घी और कम्बल देने का विशेष महत्व है।

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नव वर्ष पर आप सभी को बधाई।सभी के लिएवर्ष२०१२ खुशिओं से भरा हो।

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