Archive for अक्टूबर, 2011

धनवन्तरि जयन्ती( धनतेरस )

धनवन्तरि जयन्ती( धनतेरस )=========कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहा जाता है। इस दिन यमराज के लिए सब लोग एक-एक दीपक जलाकर अपने-अपने ग्रह द्वार पर रखते हैं और यमराज का पूजन करते हैं। इस दिन भगवान धनवन्तरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। आज के दिन किसी को पैसा नहीं देते हैं।
दीपावली आप सभी केलिए शुभ हो, यही कामना है।

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शरत पूर्णिमा

आश्वनि शुक्ल पूर्णिमा को शरद पू्र्णिमा कहते हैं। इस दिन आकाश निर्मल होता है। चाँद की किरणें पृथ्वी पर भली प्रकार पड़ती हैं। इस ददिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास किया था। कहीं -कहीं बहन आज के दिन भाई की रक्षा के लिए व्रत रखती है। विवाह के बाद परनमासी के व्रत का नियम पूर्णमासी से ही लेना चाहिए। कार्तिक का व्रत भी शरत पूर्णिमा से ही आरम्भ करना चाहिए।

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विजयादशमी(दशहरा)

दुर्गा की भाँति भगवान राम ने भी अभिमानी एवं अत्याचारी रावण का वध कर ‘राक्षसों के बधंन में पड़ी’ ‘भारत लक्ष्मी’ को मुक्त किया था। इससे न केवल सीता की ही मुक्ति हुई अपितु अन्याय , अनाचार ,अत्याचार और दानवत्व के जटिल पाश से मुक्त होकर मानवता को उन्मुक्त विचरण करने का सौभग्य मिला था। विजय-दशमी का पर्व होली और दीपावली की भाँति ऋतु चक्र से भी सम्बद्ध है। अश्वनि शुक्ला दशमी को मनाए जाने वाले इस विजय पर्व को मनाने की विविध रीतियाँ हमारे देश में प्रचलित हैं।दक्षिण भारत में शमी वृक्ष का पूजन कर उसके पत्तों को स्वर्ण समझकर लूटा जाता है। वास्तव में यह विजयोत्सव अधर्म पर धर्म की , अन्याय पर न्याय की , दानत्व पर देवत्व की विजय का प्रतीक है। हमें चाहिए कि हम भी आसुरी प्रवृत्तियों को नष्ट कर प्रजातंत्र भारत में सात्विक प्रवृत्तियों का विकास करें और न्याय तथा धर्म की स्थापना कर राष्ट्र को सबल बनाएं।आर्य जाति के इस महान पर्व पर आप सभी को मेरी ओर से शभकामना।

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