Archive for मार्च, 2011

रंगीले पर्व पर एक नमकीन डिश मटर की खस्ता कचौड़ी————

२५० ग्राम मैदा ,  ५० ग्राम रिफाइंड तेल ,   नमक स्वादानुसार,  चुटकी भर खाने का सोडा,  तलने के लिए पर्याप्त रिफाइंड तेल।
            भरने के लिए—-  १००ग्राम मटर के उबले दाने , हरी मिर्च -अदरक़ कटा हुआ,  १छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर,  चुटकी भर हींग,  आधा छोटा चम्मच जीरा, २चुटकी गर्ममसाला,  नमक,  एक बड़ा चम्मच तेल।
    मैदे में नमक,तेल सोडा मिलाकर गूँथ लें। कढ़ाही में तेल डालकर हींग व जीरा चटकाएं। अब मटर के दाने व सारी सामग्री  डालकर ३मिनट तक भूनें और ठंडा होने के लिए रख दें। गूंधे हुए मैदे को आठ भागों में बांट लें। प्रत्येक भाग को हाथ से फैलाकर एक छोटा चम्मच भरावन भरें व गोल पेड़ियाँ  बना लें। कढ़ाही गर्म करने पर प्रत्येक पेड़ी को दबाकर कड़ाही में छोढ़ दें। धीमी आँच पर हल्का सुनहरा होने तक तल लें। गरमागरम कचौड़ियां प्लेट में हरी चटनी के साथ सर्व करें।

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होली मुबारक़ और एक मन चाहने वाली रेसिपी चेरी आईसक्रीम——————-

एक टिन मिल्कमेड , डेढ़ प्याले दूध ,  तीन प्याले क्रीम ,  एक प्याला चेरी पल्प ,  दो-तीन बूंदें खाने वाला लाल रंग।
        मिल्कमेड, दूध  व चेरी पल्प  को एक बरतन में डालकर कुनकुना करके मिलाएं। फिर ठंडा  करके किसी बरतन में डालकर फ़्रीज़र में जमने के लिए रखें।जब वह आधा जम जाए तो फ्रीज़र से निकाल कर फेंटें। एक अलग बरतन में क्रीम और लाल रंग डालकर खूब फेंटें। फिर पहले से फेंटे हए चेरी वाले दूध में इसे डालकर दोबारा फेंटें। जब वह मुलायम हो जाए तो जमने के लिए फ्रीज़र में ३-४ घंटे  के लिए ढक कर रख दें। उसके बाद जब मज़ा लेना हो आईसक्रीम का ,तो निकालें ।

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प्यारे पर्व होली के अवसर पर लौकी की बर्फी पेश-ए-ख़िदमत———-

लौकी  की बर्फी=   लौकी कद्दूकस की हुई= ५०० ग्राम , खोया=५००ग्राम , चीनी = आवश्यकतानुसार , इलाइची= इच्छानुसार , चाँदी के  वर्क़= आवश्यकतानुसार।
                      लौकी के लच्छे को उबाल लीजिए।अब  चीनी की तीन तार की चाशनी तैयार कीजिए। लौकी  के उबले लच्छे और खोये को चाशनी में डालकर घोटिए। जब वह पक जाए तब थाली में घी लगाकर मिश्रण को जमा दीजिए। ऊपर से वर्क लगा दीजिए। जमने पर बर्फी के आकार का काट लीजिए।
सबको खिलाइये और खु़द भी इसका मज़ा लीजिए।

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होली———-
                      हमारा भारत त्यौहारों का देश है।  दीपावली जिस प्रकार शीत ऋतु  का पर्वहै, उसी प्रकार होली वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देती हे। होली प्रसन्नता, स्वतन्त्रता और हास-परिहास का त्यौहार है , इसमें संभवतः  सभी लोग सभी शिकवा-शिकायतों को भूलकर एक-दूसरे के गले मिलते है और  विशेष आनन्द का अनुभव करते  हैं। लोकप्रियता की दृष्टि से होली का पर्व सर्वोपरि है। भारत का प्रत्येक त्यौहार का सम्बन्ध किसी न किसी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। होली का त्यौहार भी अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। स्त्री-पुरुष पूजन करते हैं और ज्वार , गेहूँ की वालियों को भूनकर नवीन वातावरण का स्वागत करते हैं। इसलिए होली किसानों का त्यौहार है। किसानों  की फसल इस समय पककर तैयार हो जाती है, किसान इस समय फूला नहीं समाता है। होली मित्रता का त्यौहार है। घरों में मिष्ठान और पकवान बनते हैं।
      प्रत्येक पर्व का अपना महत्व होता है। होली के इस पवित्र पर्व को भाईचारे एवं सौहार्द पूर्वक मनाएं। होली की पवित्रता को बनाएं रखें।

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होली आप सबको शुभ हो

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महाशिव-रात्रि

फाल्गुन कृष्णा चतुर्दशी को महाशिव रात्रि का व्रत किया जाता है। यह भगवान शंकर का अत्यन्त  महत्वपूर्ण व्रत है। इसका समूचे भारत में प्रचार है। इस दिन शिवजी अपने सब लिंग में प्रवेश करते हैं। शिव को गंगाजी बहुत प्रिय हैं, इस दिन गंगाजल शिव को चढ़ाया जाता है। व्रत में बेर, सिंघाढ़ा,शकरकंद  का फलाहार किया जाता है। शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। रात्रि को जागरण किया जाता है। शिवजी का यह परम व्रत सबपापों को दूर करने वाला तथा वांछित फल देने वाला है। इसे प्रेमपूर्वक धारण करने से शिवलोक में स्थान मिलता है।

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