Archive for फ़रवरी, 2011

विजया एकादशी

फाल्गुन बदी११ को विजया एकादशी कहते हैं।इस व्रत में भगवान श्री नारायण का व्रत-पूजन किया जाता है।एक दिन पहले अर्थात दशमी के शाम को एक घड़ा भरकर रख लेना चाहिए।उस घड़े ने नीचे सतनजा अनाज तथा ऊपर जौ रखना चाहिए ।जौ के ऊपर भगवान नारायण की मूर्ति रखनी चाहिए।एकादशी को स्नान करके भगवान की दीप, धूप, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिएऔर नारियल भी चढ़ाना चाहिए। द्वादशी के दिन स्नानकरके वह घड़ा किसी ब्राह्मण को दान में दे देना चाहिए।स व्रत के रहने से मन में सोचा हुआ काम सफल होता है।

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सुविचार(प्रेम)

जिसको    सच्चा प्रेम है , वह हमेशा छिपाव करता  है किन्तु जो दिखावा करता है , उसको पता ही नहीं कि प्रेम कैसी वस्तु है?

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सत्यविचार(प्यार और मिलन)

शरीरों  के  मिलाप   को  मिलाप  नहीं  कहा जाता, परन्तु  दिलों के मिलाप को ही मिलाप कहा जाता है।

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वैलेंटाइन डे पर सभी सच्चे प्यार करने वाले प्यारे-प्यारियों को मेरा खूब सारा प्यार और आशीर्वाद।

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ऋतुराज बसंत—-

पौराणिक कथा के अनुसार वसंत कामदेव का पुत्र है। रुप के देवता कामदेव के घर पुत्रोत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति नृत्य करने लगती है। उसका शरीर रोमांचित हो उठता है। विविध प्रकार के पुष्प उसके आभूषण होते हैं। हरियाली वस्त्र , शीतल मंद-सुगन्ध समीर उसकी गति और कोयल की कूक उसका स्वर बन जाता है।
वसंत ऋतु के आते ही प्रकृति के वातावरण में माधुर्य घुल जाता है। शिशिर का अन्त हो जाता है। आम्र वृ्क्ष बोर का मुकुट पहने कलकंठी कोकिला  के गीत सुनने लगते हैं। पीली-पीली सरसों फूलने लगी है। वसंत पंचमी के दिन ही अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का जन्म हुआ। इस दिन धर्मवीर हकीकत ने हिन्दु धर्म की बलिवेदी पर अपने प्राणों की बलि चढ़ाई थी। महाकवि निराला की जयंती के रुप में भी अब यह दिवस मनाया जाने लगा है।
ऋतुराज वसंत का राज्य होली तक रहता है। प्रकृति इस बीच नया-नया रुप पलटती रहती है———
             ‘पल-पल पलटति रुप मधुर छबि छिन-छिन धारति।’
मेरी ओर से आप सभी को वसंत-पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं।

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