Archive for जनवरी, 2011

गणतंत्र दिवस

भारत     का  राष्ट्रीय पर्व २६ जनवरी(गणतंत्र-दिवस) के दिन  सम्पूर्ण भारत का दिल आनन्द  और हर्ष से उछल पड़ता है। इस दिन दिल्ली    का   श्रंगार  तो देखने योग्य   होता है। गणतंत्र प्रजातंत्र का ही एक स्वरुप है। आज संपूर्ण विश्व में हिंसा , द्वेष , प्रतिहिंसा  और अपहरण  तथा  शोषण की भावना ने घर कर लिया है।हमारे देश के गणतंत्र ने इन दुषित एवं कुत्सित भावनाओं  से पृथक रहकर  अहिंसा ,प्रेम समानता और भईचारे को ही   अपनाया है। इसमें संदेह नहीं कि  इस समय हमारे  गणतंत्र के सामने  अनेक कठिनाईयां है , किन्तु   जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं , उनसे ये स्पष्ट है कि हमारा राष्ट्र एक दिन विश्व में अवश्य अग्रणी होगा।

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गणतंत्र दिवस पर सभी भारतवासियों को शुभकामना———
  प्रजातंत्र  के दीप जले हैं ,  आज  नई  तरुणाई ले।
  भारत-माता की जय बोले , देश नई अंगड़ाई ले।।

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गणतंत्र दिवस पर सभी भारतवासियों को शुभकामना———

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लोहढ़ी और मकर-संक्रांति(खिचड़ी) की आप सबको बधाई।

शुद्धता और सात्विकता के साथ अंधकार से प्रकाश की ओर पहला कदम बढ़ता है मकर संक्रांति के दिन।इसदिन कोई  काले तिल से घर को सुरक्षित कर रहा है, तो कोई गंगासागर से लाए  जल में डुबकी लगाकर मकर संक्रान्ति के पावन क्षणों    में सुख़-शांति की कामना करना चाह रहे हैं।

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सत्यविचार(प्रेम)

प्रेम सच्चा अमृत  है ,  जो मनुष्य के दिल को अमर आनन्द देता है।

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सत्यविचार(प्रेम)===

सत्यविचार(प्रेम)===
               जिस आदमी ने राजा को मित्र बनाया , उसे डर किसका? इसी प्रकार जिसने परमात्मा को प्रेम के द्वारा वशीभूत किया , उसे डर अथवा चिन्ता किसकी?

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प्रेम=

प्रेम=
        प्रेम   के  मार्ग   पर   परमात्मा    के   लिए स्वयं  को  बलिदान करो। लोगों  की    निंदा  स्तुति  से  तुम्हारा  क्या  सम्बन्ध ?

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