Archive for सितम्बर, 2010

सुविचार

शासक  कहा  जाए  तो  सच्चे  सन्तों  को  । बड़े-बड़े  बादशाह  एवं  अमीर  उनके द्वार के  भिखारी   होकर  फिरते  रहते  हैं।

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सुविचार

बरसात   के  पानी  की  बूँद    सीप  में   मोती  हो  जाती  है।गुणवान   मनुष्य  तुच्छ  वस्तु  को  भी  मूल्यवान  बना देता  है।

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सुविचार

यदि  आप  दूसरों  को  सुख़ी  कर  सकें  तो  आपको स्वयं भी  सुख  प्राप्त  करने  का  अधिकार  मिले।

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सुविचार

मूर्ख    को उपदेश  देना  ऐसा  है , जैसे  अन्धे  को  दीपक  दिखाना। जो  मूर्ख  को  शिक्षा  देता  है , उसे  स्वयं  शिक्षा  की  बड़ी   आवश्यकता  है।

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सुविचार

एकता   में   आनन्द  का  उपयोग    वह  करता  है  जो  इस  और  उस  अवस्था  में  ज़रा  भी   भेद  नहीं  समझता।

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सुविचार

काल   से   बड़ा   शिक्षक    है,  जो  अन्त  में  अभिमानी       को  विनम्र  व्यक्ति    के  आगे  सिर   झुकाने  के  लिए   अपना    कठोर     आदेश  देता  है।

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सुविचार

बाँस   का  पेड़  ऊँचा  सिर  करके  खड़ा  रहता  है, अतः उसमें  फल  भी  नहीं  लगता।

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