सत्यवचन

स्वतंत्रता———    मन    पहले  ही  स्वतंत्र  है क्योंकि  एक  जगह  तो लगता  ही  नहीं , इन्द्रियाँ   पहले  ही  स्वतंत्र  हैं  क्योंकि  सब  काम  काज  करते  हुए  भी  उनमें  कुछ  अटकता   अथवा  चिपकता  नहीं , प्राण  पहले    ही  स्वतंत्र  हैं  क्योंकि  ममतारहित  हैं ,  दुनिया  का  समस्त    सामान  भी   पहले  ही  स्वतंत्र  है क्योंकि   उसके  ऊपर  किसी  का  अधिकार   रह  नहीं  सकता   , इस   प्रकार   प्रत्येक    चीज़ आजा़द है। ये  संसार  नहीं  है लेकिन  स्वतंत्रता  का  उद्यान है।

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