Archive for जुलाई, 2010

सत्यवचन

सच्ची    बुद्धिमत्ता   इसमें  है  कि  मनुष्य  अपनी  स्त्री ,अपने  धन  को  सब  कुछ  समझकर सन्तोष  रख़े और   अपनी  बुद्धि  पर  अभिमान  न  करे ,  अपितु  दूसरों  को  बुद्धिमान  समझकर   ,  उनसे   आश्चर्य   का  पाठ    पढ़ता  रहे।

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सत्यविचार

सेवकों  पर  निर्भर  न रहिए। आत्म-निर्भरता   सर्वोत्तम    गुण है।

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सत्यवचन

यदि    आप  ब्रह्मसाक्षात्कार करते   हैं  तो  यह  आपकी  बौद्धिक     खोज   ही  नहीं ,   आध्यात्मिक    विजय भी     मानी  जाएगी ।

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गुरु-पूर्णिमा

आषाण मास  की पूर्णिमा  व्यास- पूर्णिमा कहलाती  है। इसे गुरु पूर्णिमा भी  काहा  जाता  है।व्यास जी  भगवान के अवतार माने जाते हैं , उन्होंने  अट्ठारह  पुराणों की  रचना  की थी। उनके अनेक शिष्य थे।शिष्यों ने एकमत  बनाकर उनकी गुरु पूर्णिमा को पूजा की, श्री व्यास जी को ऊच्चासन पर बिठाकर कुछ लोगों ने अपने ग्रंन्थ  भेंट किए , कुछ ने फूलमाला पहनाकर और आरती  उतार कर प्रणाम किया और आशीर्वाद   का लाभ प्राप्त किया। गुरु का आशीर्वाद सब कुछ देने वाला होता है।उसी समय से गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा करने का विधान बन गया।
 श्रावण  मास  आप   सभी  के  घरों  को  हरा-भरा  रखे।

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सत्यवचन

यदि  आप  दूसरों  के  दोषों  की  ओर   ध्यान न दें तो  आपकी   छवि  स्वच्छ  रहेगी। जो  व्यक्ति  दूसरों के दोष नहीं  प्रकट  करता  है , उसके  दोष  अप्रकट  रहते  हैं।

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सत्यवचन

पत्नी    और   पति  का  आपस  में  सच्चा  प्यार     तभी   स्थापित  होता  है , जब   दोनों  का  प्यार  ह्रदय  में   बैठे   हुए  परमात्मा  की  ओर  झुकता  है।

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सत्यवचन

बार-बार मिलने से प्रेम और  सम्मान कम  होते हैं। भीलनी ,  जो चन्दन बन में रहती है , वह चन्दन की कद्र यह करती है कि प्रतिदिन रसोई घर में चन्दन की   लकड़ियाँ जलाती है।

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