विश्व पर्यावरण दिवस (५जून)

पर्यावरण   को  पावन  बनाए  रखने  में   प्रकृति  का  विशेष  हाथ  है।प्रकृति  का  संतुलन  बिगड़ा  नहीं कि  पर्यावरण  दूषित  हुआ  नहीं।प्रकृति  के  प्रति  मानव  के  अनुदार भाव  ने  प्रदूषण  की   समस्या  को  और  अधिक  भयावह  बना  दिया  है। वायु प्रदूषण   से  भयानक  जल प्रदूषण   और   खाद्य प्रदूषण  है।खाद्य-सामग्री  में  मानव  अपने   स्वार्थ  में  अन्धा  होकर  मिलावट  कर  रहा  है। मानव-जीवन  से  घिनौना  खिलवाड़ किया  जा  रहा  है। इस  सबके  लिए   सरकारी  स्तर  पर  तो  प्रयत्न  किए  ही  जा  रहे  हैं ;  मगर  हमें  व्यक्तिगत स्तर  पर  भी  सतर्क  रहना  बहुत  ज़रुरी  है।यह  समस्या  सीधी  इससे  सम्बन्ध  रख़ती  है। जो  अपनी  रक्षा  स्वयं   नहीं   करते , उनकी  रक्षा  कोई  नहीं  कर  सकता।
         प्रदूषण   मुक्त  हो  वातावरण।
         दूर  हटाओ     कृतिम  आचरण।
         तन-मन  हो  साफ़-सुथरे।
         शुद्ध         हो  हर  आचरण।।

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