Archive for जून, 2010

सत्यवचन

संसार  में   इतने  ऋषि , सन्त , महात्मा और  अवतार  हुए  हैं किन्तु  मूर्खता की  बीमारी  ज्यों की त्यों चली आ रही है।

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सत्यवचन

बड़ा  यदि  नम्रता  का  आचरण  नहीं  करता तो  उसकी इज्ज़त  और   सम्मान केवल  क्षण  भर  का  अतिथि है।

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सत्यविचार

ऋण   है  कैंची , जो  प्यार  के सम्बन्धों  को  काट देती  है।

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सत्यविचार

स्तोत्र-पाठ————  प्रार्थना के कुछ श्लोकों अथवा  स्तोत्रों  को  याद  कर  लीजिए। जपअथवा  ध्यान आरम्भ  करने  से  पहले  उनका  पाठ  कीजिए।इससे मन शीघ्र  ही  समुन्नत हो जाएगा।

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सत्यवचन

सच्ची    बुद्धिमत्ता  इसमें      है कि  मनुष्य  अपनी  स्त्री , अपने  धन  को  सब  कुछ  समझ  कर  सन्तोष  रखे और  अपनी  बुद्भि  पर  अभिमान  न करे , अपितु  दूसरों  को  बुद्दिमान समझकर , उनसे   आशचर्य  का  पाठ  पढ़ता  रहे।

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सत्यवचन

दुनिया     के  अजायबघर (म्युज़ियम)  की  ख़ूब  सैर  करो , परन्तु  कहीं  भी  अटक  न  जाओ। यहाँ  की  प्रत्येक  वस्तु  से  गुण  ग्रहण  करके  दिल  बहलाओ , परन्तु  किसी  भी  चीज़ को  अपने  बन्धन  की  जंजीर  मत  बनाओ। मोह  बड़ी  फाँसी  है।

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सत्यवचन

यदि   मौत   न  हो   तो  संसार   में   न  नेकी  होती , न भक्ति  होती। मौत  के  डर  के कारण  लोगों  में  ये  गुण  आते  हैं।

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