Archive for मार्च, 2010

श्री हनुमान जयन्ती

चैत्र   शुक्ल  पूर्णिमा  को  पवनकुमार  हनुमान  जी  का  जन्मदिन    मनाया  जाता  है।इस  तिथि  में  महावीर जी का पूजन  होता  है। श्रंगार   करके   सिंदूर  चढ़ाया  जाता  है। हनुमान जी  की  आरती  की  जाती  है  और   भोग  लगाया  जाता  है। हनुमान  चालीसा , संकट मोचन  आदि  स्त्रोतों  का  पाठ  करके   हनुमान जी की  प्रसन्नता   के  लिए  प्रार्थना   की  जाती  है।

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कामदा एकादशी

चैत  सुदी एकादशी   का  नाम  हि  कामदा एकादशी  है। इसका व्रत   रखने  से  सुख़ शांति  प्राप्त  होती  है और  अंत   में  मनुष्य  मोक्ष   प्राप्त  कर  लेता  है। इस  व्रत  में  अन्न  नहीं  खाया  जाता।फलाहार  का  विधान  है। इसमें   भगवान  वासुदेव  की   मूर्ति  रखकर  उनकी   विधानपूर्वक  पूजा  करके  फलादि  का  भोग  लगाना  चाहिए और   मूर्ति के  पास  ही    रात्रिकाल  में  पृथ्वि  पर  शयन  करना  चाहिए।

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सत्यविचार

भाग्यशाली    वह  है , जो  प्रसन्नता  से शिक्षा  सुनता  है । सौभाग्यशाली  वह  है ,जो  उसके  अनुसार  चलता है।

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नवरात्र शुभ हों——–

हमारे  देश  में    चैत्र   प्रतिपदा    से  नये  वर्ष  का  प्रारम्भ  होता  है।इस  दिन  ईरानी   लोगों  में  नौरोज़  मनाने  का  रिवाज  है।ऐतिहासिक  और   धार्मिक   दोनों  दृष्टियों   से  इस तिथि  का  भारी  महत्व  है।इस  दिन  नए वस्त्र धारण  करने , घर  को  सजाने , नीम  के  कोमल  पत्ते  खाने ,ब्राह्मणों  को  भोजन  कराने और  प्याऊ  की  स्थापना  कराने  का  भी  विधान  है।इस  दिन  नए  वर्ष  का  पंचाग सुनना चाहिए।इस  दिन  से  वासन्तिक  नवरात्र  आरम्भ   होते  हैं। आज  से  रामनवमी  के  दिन  तक  दुर्गा-पूजा का  विशेष  महत्व  है।

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सोमवती अमावस्या

जिस महीने में अमावस सोमवार को पड़ती है उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इसको परमी भी कहते हैं। इसमें गंगा-यमुना स्नान का बहुत महत्व है। स्नान करके गऊधन , सोना आदि अपनी इच्छानुसार दान करना चाहिए । तुलसी जी व शिव-पार्वती जी की पूजा भी इस दिन करनी चाहिए। कोई १०८ फल लेकर पीपल की परिक्रमा करनी चाहिए। हर एक परिक्रमा पर एक फल चढ़ा दें। तुलसी व पार्वती को सिंदूर चढ़ाकर फिर अपनी मांग में सिंदूर भरना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को दान करने का भी इस दिन महत्व है।

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सत्यविचार

खबर   की  उलझन  से  रहित  हो  तो  बेखुद  हो  सकोगे ,  क्योंकि   बेख़ुदी  के  नशे  का  शत्रु   खबर   है।

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सत्यवचन

ज्ञानी  और   अज्ञानी    में    अन्तर  यही  है  कि  ज्ञानी   दुख़  को   सुख़  बनाता  है किन्तु  अज्ञानी   सुख़   को  भी   दुख़  बना  देता  है।

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पापमोचनी एकादशी

चैत्र वदी  एकादशी  को  पाप मोचनी   एकादशी     कहते    हैं।इस  दिन  भगवान  गोविन्द  की  पूजा  होती  है।भगवान  की  प्रतिमा   को  स्नान  करा उन्हें   वस्त्र  आभूषण  से  सुसज्जित  किया  जाता है।इस  दिन दातुन  करना,  पान  खाना, दिन  में  सोना ,  दूसरों  की  बुराई , चुगली, चोरी तथा  झूठ  बोलना  वर्जित  है।

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सत्यवचन

ज्ञानवान   मनुष्य  की  दृष्टि  में  संसार   की  सारी      अनेकता         सिमट  कर   एक    परमात्मस्वरुप   हो  जाती   है।

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एक नहीं दो-दो मात्राएं, नर से बढ़कर है नारी

नारी    तुम   केवल   श्रद्धा   हो ,   विशवास  रजत  नग  पग  तल में।
पीयूष-स्त्रोत    सी    बहा  करो , जीवन  के  सुन्दर   समतल  में।।

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