हिन्दी में महिला साहित्यकार और उनकी काव्य प्रतिभा

जीवन   के  सभी  क्षेत्रों   में   स्त्री  ने पुरुषों  का  साथ  दिया  है। वह  उनकी  सहधर्मिणी  और  अर्धांगनी  है।वीर क्षत्राणियों   ने  तो  युद्ध-भूमि  में  भी  पुरुषों  का  साथ  नहीं  छोढ़ा , यहाँ  तक कि  उन्होंने  स्वयं युद्ध  संचालन  किए। हिन्दी   साहित्य  का  आदिकाल महिलाओं  की  कोमल  भावनाओं  के  अनुकूल  नहीं  था , अतः  इस  काल  में  कोई  महिला  साहित्यकार   प्रकाश  में  नही  आई।परन्तु उसके पश्चात  अन्य  सभी  कालों  में   महिलाओं  ने  साहित्य   की  वृद्धि  में   यथा शक्ति  योगदान  दिया। भक्तिकालीन   महिला   काव्यकारों  में  सहजोबाई , दयाबाई  और   मीराबाई  का   नाम   विशेष  है। अक़बर   के  शासनकाल  में  ‘राय प्रवीण’  एक  वैश्या   थी। नृत्य  और   गीत  के  साथ वह  सुन्दर   कविता  भी  करती  थी। वह  महाकवि  केशव  की   शिष्या  थी। इसके  बाद  ‘ताज’  का  नाम  आता  है। यद्धपि  यह  मुसलमान  थीं   फिर  भी  इन्हें  श्रीकृष्ण से प्रेम  हो  गया  था।इनकी  कविता  भक्तिरस  से  ओत-प्रोत है। ताज  के  पश्चात  शेख़   का  नाम  आता  है।ये  रंगरेजिन  महिला  थीं , इन्होंने एक  ब्राह्मण कवि  से  विवाह  कर  लिया  था और  उसका  नाम  आलम  रखा  था दोनों  पति-पत्नी   आनन्द  से  कविता  किया  करते  थे प्रथम  पंक्ति में  पति  प्रश्न  करते  थे , दूसरी   पंक्ति  में   शेख़  उसका  उत्तर  देतीं। साहित्य  की  सभी  विद्धाओं  पर  महिलाओं  ने  लेखनी  चलाई  है।आधुनिक  युग  की  महिला  कवियत्रीयों  में  प्रथम  नाम  श्रीमती  सुभद्राकुमारी  चौहान का  आता है। छायावादी युग  की   प्रमुख  कवियत्रीयों  में   महादेवी वर्मा  का  नाम  आता  है।कविता  के  क्षेत्र  में  श्रीमती   सुमित्राकुमारी  सिन्हा  रहीं।आधुनिक  युग  में  महिला  साहित्यकारों  की   उत्तरोत्तर  वृद्दि  होती  गई।आशा   है  कि  निकट  भविष्य  में   हिन्दी   साहित्य  को  इनकी  नवीन  साहित्य  कृतियाँ  और  भी  अधिक  समृद्दिशाली   बनाएंगी।

1 Response so far »

  1. 1

    उन्मुक्त said,

    इस चिट्ठे पर बहुत अच्छी सूचनायें और उपदेश है।

    लेकिन लगता है कि आप हिन्दी फीड एग्रगेटर के साथ पंजीकृत नहीं हैं यदि यह सच है तो उनके साथ अपने चिट्ठे को अवश्य पंजीकृत करा लें। बहुत से लोग आपके लेखों का आनन्द ले पायेंगे। हिन्दी फीड एग्रगेटर की सूची यहां है।


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