Archive for सितम्बर, 2009

विजय दशमी

हमारा  देश  भारत  पर्वों  का  देश  है।यहाँ  का  प्रत्येक  पर्व  अपनी  निजी  विशेषताओं  के लिये सार्थक  है।दशहरा(विजय दशमी)   एक  धार्मिक  और  ऐतिहासिक  त्यौहार  है।श्री राम  की  विजय  के  ही  कारण  यह  त्यौहार  विजय दशमी  के  नाम  से  जाना  जाता  है।इस  पर्व  का  सम्बन्ध  ऋतु  से  भी  जोड़ा जाता  है।मांगलिक  कार्यों  के  लिए  भी  यह  दिन  शुभ  समझा  जाता  है।वास्तव  में  यह  विजयोत्सव  अधर्म  पर  धर्म  की, दानवत्व पर  देवत्व की, अन्याय पर न्याय  की  विजय  का  प्रतीक  है।हमें  चाहिए  कि  हम  भी  आसुरी  प्रवृत्तियों  को  नष्ट  कर  प्रजातंत्र  भारत  में  सात्विक  प्रवृत्तियों  का  विकास  करें  और  न्याय  तथा  धर्म  की  स्थापना   कर  राष्टृ  को  सबल  बनाएं।
आप  सभी  को  विजय दशमी  पर  शुभकामना।

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सत्यविचार

बुद्धिमान   अपने   राह   में   काँटों  का  ढेर   देखकर, मुड़कर  चला  जाएगा।  परन्तु  मूर्ख   काँटों  के  ढेर   के  ऊपर  छलाँग  मारकर  अपने  को  काँटों  में  जाकर  फँसाएगा।  वैसे  ज्ञानी  दुनिया  के  मार्ग  में  रुकावट   देखकर , दुनिया  से  किनारा  करता  है , लेकिन  अज्ञानी   और   मूर्ख़  उसमें  ख़ुद  को  फंसाता  है।

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सत्यविचार

वह  फूल  किस  काम  का , जसमें  सुगन्घ  नहीं। वह  कथनी  कैसी  जिसमें  आचरण  नहीं।आचरणरहित  ज्ञान  ऐसा  है , जैसे  अंन्धे  के  लिए  चश्मा।करनी  रहित  कथनी  किस  काम की ? क्या  केवल  चीनी  का  नाम  लेने  से  कभी  किसी  का  मुँह  मीठा  हुआ?

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श्राद्ध

श्राद्ध  भादों  की  पूर्णमासी  से  आरम्भ  होकर  क्वार  की  अमावस्या  तक  किए  जाते  हैं। इसे  श्राद्ध  पक्ष  भी  कहा  जाता  है।  उसमें  स्नान  करके  पितरों  का  तर्पण  करते  हैं।श्राद्ध  में  ख़ीर पूड़ी  और  इमरती  खिलाने  का  बड़ा महत्व  है।

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सत्यविचार

धैर्यवान  व्यक्ति  उस  वीर  से  श्रेष्ठ  है , जिसे  केवल  ज़बान  का  बल  है। अपने  मन  पर  राज्य  करने  वाला  व्यक्ति  उस  राजा  से  श्रेष्ठ  है , जो  केवल  देश  विजय  करना  जानता  है।

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सत्यविचार

बुज़ुर्ग  वह  है , जो  दुनिया  की  दुर्घटनाओं  रुपी  आँधी  और  बरसात  में  आकाश  समान  सदैव  अप्रभावित  रहता  है।

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