सत्यविचार(अपना देश)

परमात्मा  हमारा पिता  है , हम  उसकी  सन्तान  हैं। हम  जब  सभी  भाई  हुए  है , तब  जहाँ-तहाँ  सर्वत्र  वतन  है। हे  मित्र ,  वतन  तो  वह  है, जहां  से  कभी  बिछुड़ा  न  जा  सके।अपने  उस  वतन  को  ठीक  तरह  पहचान  लो,  जहां  से  मौत  भी  तुम्हें अलग  न  कर  सके।

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