Archive for जनवरी, 2009

सुविचार(जीवन)

जीवन  स्वास्थ्य  और  आनन्द  में  बीते  तो  जीवन  का  मज़ा  है,  नहीं  तो  जीवन  विष  के  समान  है, तब  द्वेष  और  बैर  में  जीवन  को  कड़वा न  करो, अपितु  प्रेम  और  धैर्य  से  जीवन  को  प्रफुल्लित  करो।

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वसन्त पंचमी

यह  पर्व  वसन्त ऋतु  के  आगमन  का  सूचक  समझा  जाता  है। वसन्त  ऋतुओं  का  राजा  कहा  जाता  है। वैसे वसन्त  ऋतु  के  अन्तर्गत  चैत्र  और  वैसाख़  के  महीने  आते  हैं  फिर  भी  माघ  शुक्ल  पंचमी  को  ही  यह  उत्सव  मनाया  जाता  है। कारण  यह  है  कि  इसी  समय  से  ऋतुराज  वसन्त  के आने  की  सूचना  मिलने  लगती  है। ख़ेतों  में सरसों  के  फूलों  की  स्वर्णमयी  कान्ति  और  चारों  ओर  पृथ्वी  की  हरियाली   मन  में  उल्लास  भरने  लगती  है। वृक्षों  में  नयी-नयी  कोपलें  फूटने  लगती  हैं  और   बाग-बगीचे  में  अपूर्व लावण्य  छिटकने  लगता  है। पक्षियों  का  कलरव   मन  को  बरबस  ही  अपनी  ओर   ख़ीचने  लगता  है।वसन्त-पंचमी  के  दिन  भगवान्  विष्णु  की  पूजा  का विधान  है।इस  दिन  कामदेव  और  रति  की  पूजा  भी  होती  है।वसन्त   कामदेव  का  सहचर  है।वाणी  की  देवी  सरस्वती  के  पूजन  का  भी  इस  दिन  विशेष  महत्व  है।
    वसन्त पंचमी  हमारा  सामाजिक  त्यौहार  है  जो  हमारे  आनन्दोल्लास  का  प्रतीक  है।सभी  को  मेरी  ओर  से  इस  प्यारे  से  पर्व  पर  शुभकामना।

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सुविचार

मन  के  प्रतिकूल  चलने  से  संकल्प-शक्ति  बढ़ती  है।

करूणा  दुर्बलता नहीं  है।यह  दैवी-शक्ति  है।

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सत्यवचन

आभार   मानने  वाले  व्यक्ति  का  दिल  अमृत  का  सागर  है  और  उसकी  वाणी  मधुरता  का  मधुर  झरना।

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सत् विचार

बोलने   पर   बंदिश  नहीं। बात   वह   कहो, जिसे  सुनकर  सबका  मन  मौन  के  आनन्द  में  मग्न  हो  जाए।

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गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में गुड़ का मनभावन व्यंजन(मीठी पूरी)

गेहूं का आटा = दो प्याले,  गुढ़ का पानी= डेढ़ प्याला, मोयन के लिये घी= एक बड़ा चम्मच, तलने के लिये पर्याप्त तेल, बेकिंग पाउडर= आधा छोटा चम्मच।
आटे  को बेकिंग पाउडर  में  मिलाकर  छानें।घी  गर्म  करके  इसमें  मिला  दें। फिर गुढ़ को पानी  डालकर कढ़ा  गूंध  लें। दस मिनट  ढककर  रखें फिर आटा एकसार  करें और छोटी-छोटी  लोईयां  बनाकर  पूरीयां   तल  लें।ख़स्ता मीठी  पूरी  को  चटपटी  आलू  की  सब्जी अथवा  दही  के  साथ सर्व करें

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हार्दिक शुभकामना

गणतंत्र-दिवस के दिन पूरे विश्व को मेरा “जय-हिन्द”के साथ सलाम।

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मौन व्रत (मौनी अमस्या)

माघ मास की अमस्या ‘मौनी अमावस्या’ कहलाती है।इस दिन मौन रहकर गंगा-स्नान करना चाहियें। मौनी अमावस्या के दिन सोमवार हो तो उसका महत्व और बढ़ जाता है।माघ मास के स्नान का सबसे अधिक महत्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है।अमावस्या और पूर्णिमा–ये दोनों ही पर्व तिथियाँ हैं।इन दिनों में पृथ्वी के किसी न किसी भाग में सूर्य या चन्द्रमा का ग्रहण हो ही जाता है।ऐसा विचार कर धर्मज्ञ मनुष्य अमावस्या और पूरनमासी को स्नान-दानार्थ पुण्य कर्म किया करते हैं।इस दिन श्रृष्टि के रचने वाले मनुजी का जन्म हुआ था।

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गणतंत्र दिवस में सभी के लिये मंगलकामना

प्रजातंत्र   के   दीप   जले   हैं,  आज   नई   तरुणाई   ले।
भारत-माता   की   जय   बोलो, देश   नई   अंगड़ाई   ले।।

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सत्यविचार

यहाँ  प्रत्येक  अपने  कर्मों  के  सूत  से  स्वयं  ही  अपने  भाग्य  का  वस्त्र  बनाता  है।

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