Archive for दिसम्बर, 2008

सुवचन

यदि   तुम   पड़ौसी, साथी   एवं   अपने   से   नीचे   पद   वाले   को   बढ़ता   हुआ    देख़कर    प्रसन्न   होते    हो   तो    कहा    जाएगा   कि    द्वेष    तुम्हारे    यहाँ   से   विदा   हो  गया।

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सत्य वचन

दुनिया   के   तालाब   में   तृण   पत्ते   की   तरह   रहो   तो   तुम्हें   डूबने   का   डर   न   रहे। जो  पत्थर   की   तरह   भारी   हुआ,  वह   तत्काल   डूब   गया।

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सुविचार

प्रत्येक   बात ,  प्रत्येक  चाल ,  प्रत्येक  हाल ,  प्रत्येक  विचार   जिस   समय   हो , उस   समय   उससे   काम   निकालकर   तत्काल   भुला   दो   तो   दूसरे   पल   में   फिर   नये   का   नया   हो   जाओ।

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सत्यवचन

ऐसी   नम्रता   से   चलो   कि   धरती  को   तुम्हारे   पैर   ठोकर   न   मारें।यही   तो   अन्त   में   तुम्हारा    बिस्तर   बनेगी।

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सत्यवचन

मानव  यदि  स्वयं  को  समझे, तो  परमात्मा  रुप  बन  जाए, यदि  अपने  को  पहचाने, किंतु  केवल  अपने  कर्मों  को  सुधारे  तो  भी  देवता  हो  जाए  और  यदि  इन  दोनों  में  से  कुछ  भी  न  करे  तो  मिट्टी  जितना  मूल्य  भी  न  हो।

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मित्रता

मित्रता   बड़ा   अनमोल   रत्न। कब   इसे   तोल   सकता   है   धन।।
सुरपुर   की   तो   है   क्या   बिसात। मिल   जाए   अगर   वैकुण्ठ   हाथ।।
कुरुपति   के   चरणों   में   धर   दूँ। दुर्योधन   को   अर्पित   कर   दूँ।।
   प्रस्तुत   पंक्तियाँ    कर्ण   ने   श्रीकृष्ण    से   कही   थी।उससे   मित्रता   का   इतिहास   ही   धन्य   हो   गया।वास्तव  में    मित्रता   मानव-समाज   को   परमात्मा    का   सर्वाधिक   मधुर   और  प्रिय    वरदान   है।संसार    को    यदि   जलती-तपती     दोपहरी   मान   लिया   जाए    तो   मित्रता   एक    सघन     शीतल    छायादार    वृक्ष    है। धन, मान, सम्पत्ति   और   विपुल   सुख़-साधनों   के   होते   हुए  भी    यदि   किसी   व्यक्ति   के   पास   अच्छे   मित्र     नहीं   हैं    तो   वह   निरा   दरिद्र  और   अभागा   ही   है।

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शुभकामना

विश्व-शांति, प्रेम-भाव  और  ख़ुशियों  का   त्यौहार   क्रिसमस(बड़ा दिन)  पर  आप  सभी   को  परिवार  सहित  बहुत-बहुत  मंगलकामना।

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