Archive for नवम्बर, 2008

मीठा व्यंजन

गाजर  का  हलुआ==  लाल रंग की मोटी गाजरें=५००ग्राम,दूध=२किलो, खोया=१२५ग्राम, घी=२५०ग्राम, चीनी=५००ग्राम,किशमिश,काजू,बादाम की गिरी=१००ग्राम।
विधि= गाजरों  को  छीलकर  कद्दूकस  कर  लें और दूध  में  हल्के  ताप  पर  पकाइये। जब  दूध  में  गाजर  के  लच्छे अच्छी  तरह  गल जाए तो  उन्हें खूब  घोटिये। उसमें  चीनी  मिला  दीजिए। जब  सारा  दूध खुश्क  हो  जाए तो  घी  डालकर  भून  लीजिए। जब  हलुआ  घी  छोढ़ने  लगे तो  ताप से  उतार  लीजिए।मेवे  कतरकर  उसमें  डालियेऔर  खोए  का  चूरा  करके  ऊपर  से  बुरक  दीजिए।

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एक मीठा व्यंजन(फिरनी)

दूध=२००ग्राम, चावल  का  आटा=१००ग्राम, चीनी=१००ग्राम, पिस्ते=२०ग्राम, केवढ़ा=कुछ बूंदें, पिसे  हुए इलाइची  के  दाने=१०ग्राम।
विधि–किसी  पात्र  में   दूध,चावलों  का  आटा,और  चीनी  मिलाकर  पकाइये।गाढ़ा  होने  तक  इस  मिश्रण  को  चलाती  जाइए।फिर  ठंडा  होने  पर  इसमें  केवड़े  की  बूंदे  डाल  दीजिए।फिर  इन्हें मिट्टी  के सकोरों  या  प्लेटों  में  डालकर  उसके  ऊपर  पिस्ते  और  पिसी इलाइची  के  दाने  छिढ़क  दीजिए  और  सर्व  कीजिए।

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भारतीय सैनिकों को मेरा सलाम

भारतवर्ष  अपनी  आध्यात्मिकता  के  लिये  प्रारम्भ  से  ही  प्रसिद्ध  है।त्याग,तपस्या,बलिदान  और  संतोष, आदि  ही  में  यहाँ  के  निवासियों  ने  परमशांति  और  सुख  का अनुभव  किया।
  “जिस  देश  में  घर-घर  सैनिक  हों, जिसके  देशज  बलिदानी हों।
   वह  देश  स्वर्ग  है, जिसे  देख,  अरि  के  मस्तक  झुक  जाते  हों।।
  हमारे  देश   के सशक्त  सैनिकों  को  मेरी   ओर  से  शत-शत  नमन।
   “सदाचार  ही  गौरवागार  है, मनुष्यत्व   ही  मुक्ति  का  द्वार  है।”

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बथुए का रायता

दही=२५०ग्राम, बथुआ=२५०ग्राम, पिसा ज़ीरा(भुना)=एक छोटा चम्मच, पिसी लाल मिर्च=आधा छोटा चम्मच, पिसा सूखा धनिया=आधा छोटा चम्मच, हींग=आधा छोटा चम्मच, नमक=रुचि अनुसार।
 दही  को  मथ  लीजिए।बथुए  को  जल  में  उबाल  कर  बारीक  पीस लीजिए,फिर  दही  में  मिला  लीजिए।ऊपर  से  सारे  मसाले डालकर  परोसिए।

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साबूदाने का व्यंजन

साबूदाने  की  पूरी—-
सामग्री= २बड़ी कटोरी गेहूं का आटा, १बड़ी कटोरी साबूदाना, १छोटा चम्मच नमक, १छोटी चम्मच अजवाइन, तलने के लिये तेल।
साबूदाने  को  साफ़  करके  एक  बड़ी  कटोरी में  पानी  डालकर १घंटे  के  लिये  भिगो  दें।जब  साबूदाना  भीग  जाए  तो  उसके  पानी  को  निकाल  दें। गेहूं  के  आटे  को  छानकर  उसमें  नमक, अजवाइन व  साबूदाना  डालकर  गूँध लें। अब  उसकी  छोटी-छोटी  लोईयां  बनाकर  बेल  लें तथा  गुलाबी-गुलाबी  पूरियाँ  सेंक  लें और  गर्म-गर्म  सब्जी  के  साथ  परोसें।

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शरद ऋतु के अवसर पर कुछ व्यंजन

प्याज़ वाला सूजी दोसा—–
उड़द की दाल=१००ग्राम, सूजी=५०ग्राम, प्याज़ का लच्छा=५०ग्राम, तेल=५०ग्राम, ज़ीरा=एक छोटा चम्मच, नमक=रुचि के अनुसार।
 विधि=  उड़द  की  दाल  को  किसी  पात्र  में  जल  भरकर  रात  भर  भीगी रहने  दीजिए।अगले  दिन  जल  निकाल  कर  बारीक-बारीक  पीस  लिजिए।इसमें  सूजी,नमक,ज़ीरा और  प्याज़  का  लच्छा  मिलाकर पिट्ठी  को  अच्छी  तरह  फेंट  लिजिए।फिर  सादे  दोसे  की  तरह  बनाकर दुहरा  करके  प्लेट  में  रखिए  और सांभर  के  साथ  अपनों  को  खिलाइये  और  ख़ुद  भी  स्वाद  लें।

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कुछ पहेलियाँ

माटी   में   जीवन   पाती, भूमि   में   मैं   रहती।
किन्तु   जब   दानें   पा   जाती, घानी   में  पीसी   जाथ।
                             (मूंगफली)
प्रथम   कटे   तो   कीमत, खाए   उसकी   हिम्मत।
मध्य   कटे   तो  दवा, सिरदर्द   होवे   हवा।
                               (बादाम)

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