Archive for जनवरी, 2008

अज्ञेय  जी  ने  २६  जनवरी  को  आलोक  मंजूषा  की  संज्ञा  देते  हुए  भारतीय  नागरीकों  को  संबोधित  करते  हुए  कहा  है—–
                    सुनो  हे  नागरिक,  अभिनव  – सभ्य  भारत  के  जनराज्य  के।
                    सुनो  हे  नागरिक,  अभिनव  – सभ्य  भारत  के  जनराज्य  के।                    सुनो,  यह  मंजूषा  तुम्हारी  है।
                    पला  है  आलोक  चिरदिन  यह  तुम्हारे  स्नेह  से  तुम्हारे  ही  रक्त  से।
                    पला  है  आलोक  चिरदिन  यह  तुम्हारे  स्नेह  से  तुम्हारे  ही  रक्त  से।

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क्षमाशीलता   एक  ईश्वरीय गुण  है। त्रुटि करना मानवीय है। क्षमा आत्मा का स्वभाव है । क्रोध आत्मा का मनोविकार है।

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शुभकामनाएं

सभी   पाठकों  को  २६  जनवरी (गणतंत्र दिवस)  की  मेरी  ओर  से  बहुत- बहुत मंगल कामनाएं।
देश प्रेम वह  पुण्य  क्षेत्र  है,  अमल  असीम  त्याग  से  विलसित।
जिसकी  दिव्य  रश्मियां  पाकर, मनुष्यता  होती  है  विकसित।
धन्यवाद।

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दिशा  बदलने  से  दशा  बदल  जाती  है।

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दही के गुण

दही  में  प्रोटीन  की  क्वालिटी  बहुत  ज्यादा  होती  है।  दही  रात  को  नहीं खाना  चाहिये।  दही  में पिसी  काली मिर्च, सौंफ  तथा  चीनी  मिलाकर  खाने  से  नींद  आती  है। 

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आज का विचार

दुख़  सुख़  में  जो  सम  रहता  है  वह  मन  का  स्वामी  होने  में  सफल  हो  जाता  है।  उसे  मान  अपमान  प्रभावित  नहीं  करते।

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