Archive for Uncategorized

सत्य विचार

सच्चा   दान  वह  है , जो  दीन, दरएद्र  को  दिया  और  जिसकी  ख़बर  अन्य  किसी  को  न  पड़े, अपितु  स्वयं  भी  उसी  समय  भुला  दें।

Leave a comment »

सुविचार–

बरसात  के पानी  की  बूंद सीप  में  मोती  हो  जाती  है।गुणवान  मनुष्य  तुच्छ  वस्तु  को  भी  मूल्यवान  बना  देता  है।

Leave a comment »

सूर्य छठ

सूर्य छठ  का व्रत  कार्तिक सुदी  छठ  को  किया  जाता  है।इसमें  व्रत  रख़कर  भगवान  सूर्य  नारायण  की  पूजा  की  जाती  है। सू्र्य  देव  को  अर्ध्य  देकर  उन्हें  फूल  चढ़ाए  जाते  हैं  और  आरती  उतार कर  स्तुति  करते  हैं  और  उन्हें  प्रणाम करते  हैं अर्ध्य  देते  समय  भगवान  की  किरणों को  जल  में  देखने का  बड़ा  महत्व  है।भगवान  सू्र्य  सुख़  और  संतान  के  देने  वाले, आँखों  को  ज्योति  प्रदान  करने  वाले  तथा  रोगों  को  दूर  करने  वाले हैं।

Leave a comment »

यम द्वितीया (भैय्या दूज) की मेरी ओर से बहुत सारी शुभकामनाएं।

Leave a comment »

धनतेरस आप सभी को शुभ हो।

Leave a comment »

दीपावली की शुभकामनाएँ

मनुष्य   एक   सामाजिक   प्राणी   होने   के   नातेसामाजिक  वातावरण  में  ही  हर्ष , विवाद और  सुख़-दुख़  का  अनुभव  करता  है। मानव   आनन्द  का  अनुभव  करने  के  लिए   विशेष  अवसरों  की  खोज  करता  है।त्यौहार उन  विशेष  अवसरों में  से  एक  हैं।पर्व  जीवन  में  आनन्द  और उल्लास  पैदा  करते   हैं । दीपावली  का  साधारण   अर्थ  दीपों   की    पंक्ति   का  उत्सव   है। दीपक  का  प्रकाश  ज्ञान   व   उल्लास  का  प्रतीक  है। वास्तव  में   इस  त्योहार  का  आरम्भ  धनतेरस  से  ही   होता   है। इस  समय  वर्षा   ऋतु  समाप्त  हो  जाती  है , इसलिए  इसका  महत्व  और   भी  बढ़  जाता   है।वर्षा ऋतु   की   गंदगी, कीड़े-मकोड़े  आदि  को  इस  त्यौहार  के  माध्यम  से  हटा  दिया  जाता  है। दीपावली  का  पर्व  अत्यन्त  लाभप्रद  है।इस  बहाने   बरसात  के  बाद  सफ़ाई  हो  जाती  है।सफ़ाई  से  स्वास्थ्य  ठीक  होता  है, जिससे  आयु  में   वृद्धि   होती  है।सरसों  के  तेल  के  दीपक  किटाणुओं   का  नाश  करने  में  समर्थ  होते  हैं। यह  आशा , ज्ञान , प्रकाश  एवं  सौहार्द का  पर्व  है।ईश्वर  लोगों   को सद् बुद्धि  दें कि वे  मदिरापान  एवं  जुऐ  को  त्यागकर  ज्ञान  की  लौ  को  अपने  ह्रदय  में  बसाकर  ज्ञानी  बनें।
  दीपावली  के  साथ  अनेक  महापुरुषों   के  जीवन  चरित्र  संबद्ध  हैं।दीवाली  हमें  त्याग  और  संगठन  का  संदेश  देते  हुए  कहती  है—-
  दीपमाला    कह    रही    है ,  दीप   से  युग  युग  जलो।।
  घोरतम   को   पार   कर ,  आलोक   बनकर   तुम   ढलो।।

Leave a comment »

शरत पूर्णिमा

आश्विन  शुक्ला  पूर्णिमा  को  ‘शरत-पूर्णिंमा’  कहते  हैं।माताएं  आज  के  दिन  अपनी  संतान  की  शुभकामना  के  लिए  व्रत  पूजन  किया  करती  हैं। इस  दिन  आकाश  निर्मित  होता  है अतः  चाँद  की  किरण  पृथ्वी  पर  भली  प्रकार  पड़ती  है।।कुछ  विद्वानों  का  मत  है  कि  इस  दिन  चंद्रमा  पृथ्वी  के  करीब  आ  जाता हैऔर  उसकी  किरणों  में  अमृत  होता  है।इस  दिन  भगवान  श्री कृष्ण  ने  महारास  किया  था, इस  कारण  आज  के  दिन  महारास  की लीला  अधिकाँश  लोग  खेलते  हैं। कहीं कहीं  बहन  आज  के  दिन भाई  की  रक्षा  के  लिए  व्रत  रहा  करती  है।इस  दिन  खीर  बनाकर  भगवान  को  अर्पण  करें।

Leave a comment »

विजय दशमी

हमारा  देश  भारत  पर्वों  का  देश  है।यहाँ  का  प्रत्येक  पर्व  अपनी  निजी  विशेषताओं  के लिये सार्थक  है।दशहरा(विजय दशमी)   एक  धार्मिक  और  ऐतिहासिक  त्यौहार  है।श्री राम  की  विजय  के  ही  कारण  यह  त्यौहार  विजय दशमी  के  नाम  से  जाना  जाता  है।इस  पर्व  का  सम्बन्ध  ऋतु  से  भी  जोड़ा जाता  है।मांगलिक  कार्यों  के  लिए  भी  यह  दिन  शुभ  समझा  जाता  है।वास्तव  में  यह  विजयोत्सव  अधर्म  पर  धर्म  की, दानवत्व पर  देवत्व की, अन्याय पर न्याय  की  विजय  का  प्रतीक  है।हमें  चाहिए  कि  हम  भी  आसुरी  प्रवृत्तियों  को  नष्ट  कर  प्रजातंत्र  भारत  में  सात्विक  प्रवृत्तियों  का  विकास  करें  और  न्याय  तथा  धर्म  की  स्थापना   कर  राष्टृ  को  सबल  बनाएं।
आप  सभी  को  विजय दशमी  पर  शुभकामना।

Leave a comment »

सत्यविचार

बुद्धिमान   अपने   राह   में   काँटों  का  ढेर   देखकर, मुड़कर  चला  जाएगा।  परन्तु  मूर्ख   काँटों  के  ढेर   के  ऊपर  छलाँग  मारकर  अपने  को  काँटों  में  जाकर  फँसाएगा।  वैसे  ज्ञानी  दुनिया  के  मार्ग  में  रुकावट   देखकर , दुनिया  से  किनारा  करता  है , लेकिन  अज्ञानी   और   मूर्ख़  उसमें  ख़ुद  को  फंसाता  है।

Leave a comment »

सत्यविचार

वह  फूल  किस  काम  का , जसमें  सुगन्घ  नहीं। वह  कथनी  कैसी  जिसमें  आचरण  नहीं।आचरणरहित  ज्ञान  ऐसा  है , जैसे  अंन्धे  के  लिए  चश्मा।करनी  रहित  कथनी  किस  काम की ? क्या  केवल  चीनी  का  नाम  लेने  से  कभी  किसी  का  मुँह  मीठा  हुआ?

Leave a comment »