छब्बीस जनवरी आकर कहती हर बार, संघर्षों से ही मिलता है जीने का अधिकार।।
स्वतंत्रता वरदान है और परतंत्रता अभिशाप।भारत देश को भी शताब्दियों तक पराधीनता का अभिशाप सहन करना पड़ा। भारत क्वतंत्र तो हो गया पर उसका कोई अपना संविधान नहीं था। सन१९५० में देश के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा नया संविधान बनने पर २६जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। गणतंत्र का अर्थ है सामुदायिक व्यवस्था।
आज संपूर्ण विश्व में हिंसा , द्वेश , प्रतिहिंसा , और अपहरण तथा शोषण की भावना नेण घर कर लिया है। हमारे देश के गणतंत्र ने इन दूषित एवं कुत्सित भावनाओं से पृथक रहकर अहिंसा , प्रेम , समानता और भाईचारे को ही अपनाया है। इसमें सन्देह नही कि इस समय हमारे गणतंत्र के अने क कठिनाईयां हैं ,किन्तु जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि हमारा राष्ट्र एक दिन विश्व में अवश्य अग्रणी होगा ।
शिवमंगल सिंह ‘सुमन ‘ने पिंजरे में बन्द पक्षी के माध्यम से पराधिनता के उत्पीड़न को प्रकट करते हुए कहा है———– नीड़ न दो चाहे टहनी का , आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।।
२६ जनवरी पर आप सभी को ढेर सारी बधाईयां।