मकर संक्रान्ति -भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य की बारह राशियाँ मानी गई हैं।जब सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है तब ‘मकर संक्रान्ति’ होती है। मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरायण और कर्क संक्रान्ति से सूर्यदक्षिणायन हो जाता है।उत्तरायण में दिन बड़ा होता है, रात छोटी और दक्षिणायन में रात बढ़ी और दिन छोटा होता है कहा जाता है कि इस दिन यशोदा जी ने कृष्ण के जन्म केलिए व्रत रखा था। यह प्रतिवर्ष १४ जनवरी को होती है।इस दिन गंगा- यमुना स्नान का बड़ा महत्व है। मकर संक्रान्ति के दिन खिचड़ी और तिल के बने लड्डू गरीब ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। महाराष्ट्र में विवाहित लड़किया ंइस दिन तेल , कपास , नमक आदि सौभाग्यवती स्त्रियों को देती हैं। बंगाल में भी स्नान और तिल दान की प्रथा है। गंगा सागर में इस दिन बड़ा भारी मेला लगता है। इस महीने में घी और कम्बल देने का विशेष महत्व है।