मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के नातेसामाजिक वातावरण में ही हर्ष , विवाद और सुख़-दुख़ का अनुभव करता है। मानव आनन्द का अनुभव करने के लिए विशेष अवसरों की खोज करता है।त्यौहार उन विशेष अवसरों में से एक हैं।पर्व जीवन में आनन्द और उल्लास पैदा करते हैं । दीपावली का साधारण अर्थ दीपों की पंक्ति का उत्सव है। दीपक का प्रकाश ज्ञान व उल्लास का प्रतीक है। वास्तव में इस त्योहार का आरम्भ धनतेरस से ही होता है। इस समय वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है , इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।वर्षा ऋतु की गंदगी, कीड़े-मकोड़े आदि को इस त्यौहार के माध्यम से हटा दिया जाता है। दीपावली का पर्व अत्यन्त लाभप्रद है।इस बहाने बरसात के बाद सफ़ाई हो जाती है।सफ़ाई से स्वास्थ्य ठीक होता है, जिससे आयु में वृद्धि होती है।सरसों के तेल के दीपक किटाणुओं का नाश करने में समर्थ होते हैं। यह आशा , ज्ञान , प्रकाश एवं सौहार्द का पर्व है।ईश्वर लोगों को सद् बुद्धि दें कि वे मदिरापान एवं जुऐ को त्यागकर ज्ञान की लौ को अपने ह्रदय में बसाकर ज्ञानी बनें।
दीपावली के साथ अनेक महापुरुषों के जीवन चरित्र संबद्ध हैं।दीवाली हमें त्याग और संगठन का संदेश देते हुए कहती है—-
दीपमाला कह रही है , दीप से युग युग जलो।।
घोरतम को पार कर , आलोक बनकर तुम ढलो।।