वह फूल किस काम का , जसमें सुगन्घ नहीं। वह कथनी कैसी जिसमें आचरण नहीं।आचरणरहित ज्ञान ऐसा है , जैसे अंन्धे के लिए चश्मा।करनी रहित कथनी किस काम की ? क्या केवल चीनी का नाम लेने से कभी किसी का मुँह मीठा हुआ?
वह फूल किस काम का , जसमें सुगन्घ नहीं। वह कथनी कैसी जिसमें आचरण नहीं।आचरणरहित ज्ञान ऐसा है , जैसे अंन्धे के लिए चश्मा।करनी रहित कथनी किस काम की ? क्या केवल चीनी का नाम लेने से कभी किसी का मुँह मीठा हुआ?