भारतवर्ष प्राकृतिक सुरम्यता, रमणीयता और बासन्ती वैभव के लिए विश्व में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में वृक्षों में देवत्व का आरोपण किया गया था।उनकी पूजा की जाती थी और उनके साथ मनुष्यों की भाँति आत्मीयता बरती जाती थी।किन्तु अब सघन वन कुंजों का स्थान फैक्ट्रियों ने ले लिया।वृक्ष निर्दयता के साथ काटे जा रहे हैं।इस कारण जलवायु में नीरसता एवं शुष्कता आ गई है।पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है।वृक्ष जबकि हमें नैतिक शिक्षा देते हैं।मनुष्य के निराशाओं से भरे जीवन में आशा और धैर्य की शिक्षा विद्वानों ने वृक्षों से सीखना बताया है।अतः यह सिद्ध सत्य है कि वृक्ष हमारे देश की नैतिक, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के मूल स्त्रोत हैं।