ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा कहते हैं।इस व्रत का विधान स्कन्द-पुराण में और गंगावतार की कथा बाल्मिकी रामायण आदि में वर्णित है।गंगा जी की महिमा अपार है। धार्मिक दृष्टि से ही नहीं स्वास्थ्य-लाभ की दृष्टि से भी।गंगा-स्नान और गंगाजल का पान स्वास्थ्यप्रद है।सभी ऋषि-मुनियों ने मुक्त कंठ से गंगाजी के माहात्म्य का गान किया है।इसी तिथि को बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र में गंगाजी भूतल पर अवतीर्ण हुइ थीं, इसलिए यह तिथि महान् पुण्य-पर्व मानी गई है। इसमें स्नान,दान,तर्पन से दश पापों का हरण होता है।इसलिए इसका नाम दशहरा पड़ा।गंगाजी पाप नाशिनी और तारन तरनी तथा सब सुख़ोंको देने वाली हैं।
Archive for May, 2009
वट-सावित्री पूजन(२४मई)
ज्येष्ठ कृष्णा अमावस्या को वट-सावित्री पूजन होता है। यह सौभाग्यवती स्त्रियों का प्रमुख पर्व है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।कहीं-कहीं पर ये त्यौहार ज्येष्ठ कृष्णा त्रयोदशी से अमावस्या तक मनाया जाता है।
भारतीय किसान
ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण करते हैं, विष्णु पालन करते हैं तथा महेश सहार करते हैं, इस प्रकार सृष्टि-संचालन तीनों देवताओं में विभक्त है। इस पर विश्वास करके यदि हम कृषकों को ही विष्णु कह दें तो न इसमें कोई अतिश्योक्ति होगी। विश्व का समस्त वैभव, आमोद-प्रमोद सब कुछ कृषक के बलिष्ठ कन्धों पर आश्रित है। आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर आधारित हैं।तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और परिश्रम का यदि चित्र देखना है, तो आप भारतीय किसान को देखिए। यह स्वयं न खाकर दूसरों को ख़िलाता है।स्वयं न पहनकर संसार को वस्त्र देता है, उसके अनुपम त्याग की समानता संसार की कोई वस्तु नहीं कर सकती। भातीय किसान की आकृति से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कोई सन्यासी हो, जिसे न मान का हर्ष है और न अपमान का खेद ; न फटे कपड़े पहनने का दुख़ है और न कभी अच्छे वस्त्र पहनने की प्रसन्नता, जिसे न दुःख में दुःख है और न सुख की कामना, जिसे न अज्ञानता से आत्मग्लानि होती है और नदरिद्रता से दीनता। किसान वह साधक है कि साधना करते हुए जिसके ह्रदय में कभी सिद्दि की इच्छा उत्पन्न नहीं होती किसान कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म करने में तल्लीन रहता है। उसका छोटा सा संसार इस संसार से अलग है। यह उसी में पैदा होता है और कामना-रहित जीवन व्यतीत करता है।संसार में ऊषा की लालिमा फैलने से पूर्व ही किसान एक प्रहरी की भाँति जग उठता है।
सत्यविचार
जो मनुष्य अपने से अधिक बुद्धिमान से वाद-विवाद करता है, इस विचार से कि दूसरे उसे बुद्धिमान समझें , वास्तव में वह मूर्खता को साबित कर रहा है।
सुविचार
प्रत्येक चाहता है कि मैं सदैव प्रसन्न रहूँ। उस कामना के होते हुए भी प्रत्येक जानबूझ कर अपने को द्वेष और बैर की अग्नि में जला रहा है, अफ़सोस
शुभकामना
वर्ड फैमिली डे आप सभी के लिए शुभ हो। सभी अपने परिवारजनों के साथ जीवनभर खुशियों के दिन बिताएं।मेरी यही कामना है।
सत्य विचार
बुज़ुर्ग वह नहीं है,जो आयु में बढ़ा है, परन्तु वह है, जो अनुभव और बुद्धि में बड़ा है।
मां दिवस मुबारक़(१०मई)
मदर्स डे के लिए मुझे एक बचपन की कविता याद आ गई जिसे मैं आप सबसे बाँटना चाहति हूँ——-
मेरी माता मेरी माता।माता को मैं शीष झुकाता।।
सुबह-सवेरे मुझे जगाती। मधुर-मधुर संगीत सुनाती।।
रोज़ कराती है तैयारी। मेरी मम्मी कितनी प्यारी।।
दूध नाश्ता मुझे खिलाती। न्हिला धुला कपड़े पहनाती।।
हर दम काम किया करती है। वह आराम नहीं करती है।।
उनके बिन लगता घर खाली। जैसे हो बगिया बिन माली।।
मातृ- दिवस सभी माताओं के लिए शुभ हो।