प्रेम सच्चा अमृत है,जो मनुष्य के दिल को अमर आनन्द देता है।
Archive for April, 2009
सुविचार
जो सत् गुरु को अपना आत्म-स्वरुप करके देख़ता है, वह सत् गुरु से सच्चा लाभ करता है।जो सत् गुरु को अने से अलग अथवा दूर समझता है, वह सत् गुरु से पूरा लाभ प्राप्त नहीं कर सकता।
सुविचार
जो दूसरे के दर्द को देख़कर दुख़ी होता है, भगवान उसके सभी दर्दों को दूर करता है।
सुविचार
कली जब तक बन्द है, तब तक कोई उसे नहीं तोड़ता। जब खिलने लगती है, तब प्रत्येक उसे तोड़-मरोड़ जाता है। जबान भी जब तक बन्द है, तब तक कोई दुख़-दर्द उसके पास नहीं आता, यदि खुली तो सैकड़ों दर्द सहेगी।
अक्षय तृतीया
वैसाख़ शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं।यह दिन बहुत पवित्र माना गया है।इस दिन होम, जप,तप,दान, स्नान आदि अक्षय रहते हैं। इस दिन गंगा स्नान का भारी माहात्म्य है।इस दिन प्रातःकाल घड़ी, पंखा, चावल, दाल, नमक, घी, चीनी,साग,इमली,फल और दक्षिणा ब्राह्मणों को देनी चाहिए।इस दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।जिन लोगों ने अपने घरोंमें ठाकुरद्वारा बना रखा है वे ठाकुरद्वारे में और जिन्होंने नहीं बना रखा है वे श्री बद्रीनारायण जी का चित्र सिंहासन पर रखकर मिश्री और भीगे हुए चने का भोग लगाएं। तुलसी जल चढ़ाएं और भगवान की श्रद्धापूर्वक पूजा करके आरती करें।
आप सभी को अक्षय-तृतीया शुभ हो।
सुविचार
पत्नी और पति का आपस में सच्चा प्यार तभी स्थापित होता है, जब दोनों का प्यार ह्रदय में बैठे हुए परमात्मा की ओर झुकता है।
सुविचार
दुनियाँ में कुछ ऐसी परिस्थितियाँ होती हैं, जिन्हें बदल नहीं सकते।किन्तु अपने विचार को बदलने से परिस्थितियों के प्रभावों में बड़ा परिवर्तन आ जाता है।
सुविचार
जो अपने को स्वामी समझता है, उसे नौकर होकर रहना पडता है और जो स्वयं को नौकर समझता है, वह स्वामी होकर रहता है।
सुविचार
मन, वचन और कर्म में साम्य लाने की कोशिश कीजिए। मन में कुछ सोचना, वचन से कुछ अन्य बात ही बोल देना और कर्म से कोई तीसरा कर्म कर गुजरना अच्छा नहीं है।
सुविचार
दुनिया में हर प्रकार के विद्वान , पंडित , तत्ववेत्ता , कलाकार आदि आसानी से मिल सकते हैं किन्तु सतगुरुओं का मिलना अत्यन्त कठिन है।