अपने अतीत के दुष्कर्मों का पश्चाताप मत कीजिए। जो आप अब बनना चाहते हैं, वह बन कर दिखाइये।
Archive for February, 2009
महाशिव-रात्रि
फालगुन कृष्णा चतुर्दशी को महाशिव-रात्रि का व्रत किया जाता है। यह भगवान शंक का अत्यन्त महत्वपूर्ण व्रत है। इसका समूचे भारत में प्रचार है।भगवान् शंकर की बिल्वपत्रों से पूजा करनी चाहिए।रातभर जागरण करके भग् वान की कथाओं का श्रवण-मनन करना चाहिए। शिव-चालीसा इत्यादि का पाठ किया जाता है।
सुविचार
दुख़ तब होता है, जब बीती बात याद आती है अथवा आगामी की चिन्ता होती है। यदि दोनों भूल जाएँ तो सर्व आनन्द है।
सत्यवचन
जो मनुषय अपने से अधिक बुद्धिमान से वाद-विवाद करता है, इस विचार से कि दूसरे उसे बुद्धिमान समझें, वास्तव में वह मूर्खता को साबित कर रहा है।
सुविचार
सौन्दर्य देखो तो ऐसा देखो कि एक बार देखने से सभी इन्द्रियों की तृप्ति हो जाए। स्वाद लो तो इस प्रकार लो कि सभी इन्द्रियों को हमेशा के लिए तृप्ति आ जाए। सुगन्ध इस प्रकार लो कि दिमाग हमेशा के लिए पुर हो जाए।
सुविचार
यदि सहनशीलता का मधुर स्वाद लो और बलिदान का अमूल्य मूल्य पहचान सको तो प्रत्येक कष्ट तुम्हारे लिये तरावट बन जाए।
सुविचार
लोग शोक के लिये इकट्ठे हुए हों अथवा उत्सव के लिये। दीपक दोनों अवस्थाओं में वही प्रकाश देता है। इसी तरह हम सबको भी खुशी अथवा गम में दिल को प्रसन्न रखना चाहिए।
जानकी व्रत
फाल्गुन कृष्णा अष्टमी को जानकी व्रत किया जाता है।इसमें जनकसुता श्री जानकीजी का पूजन होता है।गुरुवर वशिष्ठजी की आज्ञा से भगवान् श्रीरामचन्द्र जी से समुद्र तट की तपोमय भूमि पर बैठकर यह व्रत किया था। अपनी अभिष्ट सिद्धि के लिये यह व्रत किया जाता है। कुछ वैष्णव ग्रन्थों के मतानुसार वैशाख शुक्ला नवमी को जानकीजी का जन्म हुआ था।
सुविचार
एक महापुरुष का वचन है कि मकोड़ी की भाँति नम्र बनो, जो पैरों से कुचली जाती है, लेकिन कुछ भी कहती नहीं।ततैये की भाँति कठोर न बनो, जो आकाश में उड़ता है, परन्तु सबको पीड़ा देता है।