उद्यान-बगीचा

मानव   आनन्दप्रिय   प्राणी   है। वह   जीवन   पर्यन्त   आनन्द   को   खोजता   रहता   है। वह   आनन्द   की    तृष्णा    की   पूर्ति   के   लिये   समय-समय    पर   अनेक   खोजें    करता    रहा   है। आधुनिक   रेडियो,टी०वी०,विविध संगीत,विविध वाद्य   मनुष्य   के   इसी    आनन्दमयी   स्वभाव   के   कारण   ही   आविर्भूत   हुए।इसी   तरह   उद्यान    कला   का   जन्म   भी   मनुष्य    की   आनन्दमयी   खोज  के   कारण  ही   हुआ  है। इसके    द्वारा   मनुष्य   प्रकृति   का    पूर्ण     आनन्द    अपने   आस-पास   उद्यानों   के   द्वारा   प्राप्त    कर    लेता  है।यद्यपि   उद्यान   प्राकृतिक   नहीं    हैं   परन्तु  वे   मानव  और    प्रकृति   के   सम्बन्ध को स्थिर   रखने    में   सहायक   होते    हैं। उद्यान   का   आनन्द  बड़ा   ही   अपूर्व   होता   है।मैंने   भी    अपने     घर   में   एक     बगीचा   लगाया   हुआ    है, उसमें  तरह-तरह   के   पेड़-फूल    लगाए   हैं।प्रातःकाल  अगर   उसमें   जाओ   तो  शीतल,  मन्द-सुगंध    से    युक्त   वायु     बहती   है,पेड़ों     के   पत्तों   पर   ओस-बिन्दु   ऐसे   प्रतीत     होते   हैं  मानो    मोती    बिखरे   हों। मैंने   विविध    प्रकार   के  गुलाब   लगाएं   हैं, जो   अपूर्व  खुशबू    और  सुन्दरता  प्रदान   करते   हैं।मैंने   हरसिंगार,रात की  रानी,अमरुद,आम,पपीता,इत्यादि  कई    पेढ़   लगा   रखे  हैं।पेड़ों पर पक्षी-समूह   कलरव   करता   है।तरह-तरह   के   फूल    सारे   वातावरण   को   सुगन्धित   कर  देते   हैं और   मुझे    पूजा   में    चढ़ाने     के   लिये    फूल    भी    अपने   ही     बगीचे   से   मिल   जाते   हैं।स्वास्थ्य    के   लिये    उद्यान   एक    अचूक   औषधि   का    काम   करते   हैं।
    अगर   घर    में    बगीचा    लगाना   संभव    न  हो  तो  प्रातःकाल एवं  सायं   अवश्य   उद्यान    में  जाना   चाहिये।उद्यान  से   आनन्द   ही   प्राप्त   नही   होता   बल्कि  इनमें   अनेक   लाभ   भी   हैं जिनमें    स्वास्थ्य-लाभ   प्रमुख   है। इसमें     घूमने   से   मस्तिष्क    तर   हो  जाता   है  और   सारी   थकान    दूर   हो   जाती    है। उद्यानों    का   आनन्द   अकथनीय   है।प्रकृति   के   अक्षय   सुख   और   आनन्द  को    उद्यान   हमारे   निकट  ला   देते   हैं। अतः   लोगों   को  अधिकाधिक   उद्यान    लगाने    चाहियें और    उनसे    होने   वाले    लाभों   से    मनुष्य    को   परिचित   होना  चाहियें। कठिन   रोगों     से   ग्रस्त     होने   पर   मनुष्य    अगर   प्रतिदिन   उद्यानों   में  घूमे   तो  असाध्य   रोग   भी   दूर   हो   जाते   हैं।

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