प्याज़ के निरन्तर प्रयोग से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। प्याज़ गरीबों की कस्तूरी है।प्याज़ खाने को पचाने में सहायक है। अम्लपित्त ठीक करता है। जी मिचलाने पर प्याज़ नमक के साथ खाने से लाभ होता है। १००ग्राम प्याज़ के रस में ५०ग्राम शक्कर मिलाकर पीने से रक्तस्त्रावी बवासीर में लाभ होता है। प्याज़ के रस में शहद मिलाकर चाटना भी लाभदायक है।सरसों का तेल और प्याज़ का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया के रोगी को लाभ होता है। जिनके ह्रदय की धड़कन बढ़ गई हो, ह्रदय रोग से बचना चाहते हिं, वे कच्चा प्याज़ नित्य खायें। लकवे में इसका प्रयोग मददगार है। प्याज़ में पाया जाने वाला गंधक,सोडियम पोटाश आदि पदारथ मानव शरीर के लिये उपयुक्त हैं।
sameerlal said,
August 29, 2008 @ 2:29 pm
बहुत बढ़िया जानकारी, आभार!