मूली कच्ची खायें या इस के पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं, हर प्रकार से बवासीर में लाभदायक है। गर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बन्द हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है।मूली खाने से मधुमेह में लाभ होता है।एक कच्ची मूली नित्य प्रातः उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है।गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारें आती हो तो एक कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।मासिक धर्म की कमी के कारण लड़कियों के यदि मुहाँसे निकलते हों तो प्रातः पत्तों सहित एक मूली नित्य खाएं।
Archive for August, 2008
लहसुन से घरेलू चिकित्सा
लहसुन का नित्य सेवन रोगों से बचाव करता है। लहसुन उत्तेजक और चर्मदाहक होता है।गला बैठने पर गर्म जल में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करें। पाचन-क्रिया को लहसुन से बड़ा बल मिलता है। लहसुन में एल्लीसिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो उन किटाणुओं को नष्ट करता है जो पेनीसिलीन से नष्ट नहीं होते। लहसुन को दूध में उबालकर लेते रहने से ह्रदय रोग में लाभ होता है। ह्रदय को बल मिलता है।लहसुन के निरन्तर प्रयोग से असमय ही बुढ़ापे के शिकार से बचा जा सकता है, यानि झुर्रियाँ न होना। लहसुन खाने से पेट का कैंसर नहीं होता।
प्याज़ और घरेलू चिकित्सा
प्याज़ के निरन्तर प्रयोग से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। प्याज़ गरीबों की कस्तूरी है।प्याज़ खाने को पचाने में सहायक है। अम्लपित्त ठीक करता है। जी मिचलाने पर प्याज़ नमक के साथ खाने से लाभ होता है। १००ग्राम प्याज़ के रस में ५०ग्राम शक्कर मिलाकर पीने से रक्तस्त्रावी बवासीर में लाभ होता है। प्याज़ के रस में शहद मिलाकर चाटना भी लाभदायक है।सरसों का तेल और प्याज़ का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया के रोगी को लाभ होता है। जिनके ह्रदय की धड़कन बढ़ गई हो, ह्रदय रोग से बचना चाहते हिं, वे कच्चा प्याज़ नित्य खायें। लकवे में इसका प्रयोग मददगार है। प्याज़ में पाया जाने वाला गंधक,सोडियम पोटाश आदि पदारथ मानव शरीर के लिये उपयुक्त हैं।
पत्तागोभी और घरेलू चिकित्सा
पत्तागोभी के कच्चे पत्ते ५०ग्राम नित्य खाने से पायोरिया रोग में लाभ होता है।कैंसर की आरम्भिक अवस्था में प्रातः खाली पेट आधा कप कैबिज का रस पीयें,अवश्य लाभ होगा। बात-बात पर निराश होने वाले लोगों को ‘कोलाइटिस’ रोग हो जाता है, पत्तागोभी इसमें भी लाभदायक है।
फूलगोभी और घरेलू चिकित्सा
फूलगोभी दोनों प्रकार की बवासीर को ठीक कर सकती है। गोभी में गन्धक बहुत होता है,यह रक्तशोधक है। कोलाइटिस,कैंसर में प्रातः भूखे पेट पौन कप गोभी का रस पीने से लाभ मिलेगा। गोभी से चर्म रोग, नाखून और बालों के रोग नष्ट होते हैं।
आलू के द्वारा घरेलू चिकित्सा
आलू में लोहा, कैल्शियम, विटामिन बी० तथा फासफोरस बहुतायत में होता है। आलू खाते रहने से रक्त्तवाहिनियाँ बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं। आलू को छिलका सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी होता है। कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है,नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएं।गुर्दों में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने से बहुत लाभ होता है। आलू की प्रकृति क्षारीय है जो अम्लता को कम करती है। आलू को पीसकर त्वचा पर मलें, रंग गोरा हो जाएगा।आलूओं की प्रोटीन बूढ़ों के लिये बहुत ही शक्ति देने वाली और बुढ़ापे की कमज़ोरी दूर करने वाली है।
चुकन्दर और घरेलू चिकित्सा
चुकन्दर मस्तिष्क को ताज़ा रख़ता है, जोड़ों का दर्द दूर करता है, रक्त बढ़ाता है और स्त्रियों संबंधी रोग दूर करता है।श्वास नली को साफ़ रखने में चुकन्दर लाभकारी है। यह पेशाब ज्यादा लाता है।चुकन्दर उबालकर उसका सूप पीने से पथरी गल कर निकल जाती है।
पालक के द्वारा घरेलू चिकित्सा
पालक में विटामिन ए० , बी० , सी० , लोहा और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। कच्चा पालक गुणकारी होता है। सम्पूर्ण पाचन-तंत्र की प्रणाली के लिये पालक पोषक-कर्ता है। खाँसी, फेफड़ों की सूजन हो तो पालक के रस के कुल्ले करने से लाभ होता है। शरीर में रक्त की वृद्धि के लिये आधे गिलास में दो चम्मच शहद मिलाकर ५०दिन पीयें। नेत्र-ज्योति पालक का रस पीने से बड़ती है।
ख़ीरा से घरेलू चिकित्सा
ख़ीरे का रस पथरी में लाभदायक है।भोजन में खीरा ज़रुर खाएं, इससे घुटनों का दर्द दूर होता है। ख़ीरा पीलिया , शरीर की जलन , गर्मी के सारे दोष और चर्म रोगों में लाभदायक है।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के उपलक्ष में एक मीठा व्यंजन(संदेश)
पिस्ता=८-१० , बादाम=१०-१२ , केसर= एक बड़ी चुटकी , हल्का गर्म दूध= एक बड़ा चम्मच , ताज़ा बना पनीर= ४००ग्राम , चीनी पाउडर= आधा कप , हरी इलाइची पाउडर= आधा छोटा चम्मच।
पिस्ता और बादाम एक कप पानी में दस मिनट तक भिगोएं। पानी निकालें, छीलें और काट लें। केसर को हल्का पीसकर हल्के गर्म दूध में घोलें। कटा हुआ पिस्ता दूध-केसर मिश्रण में डालें। अपनी हथेली से पनीर को मुलायम होने तक गूंधें। चीनी व इलाइची पाउडर मिलायें और अच्छी तरह गूंधें। मिश्रण को एक कड़ाही में डालें और कम आंच पर ५-६ मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं। आँच से हटाएं और कुछ ठंडा होने तक हल्के ढंग से मिलाएं। कटे बादाम मिलाएं और २० बराबर भागों में बाँटें। प्रत्येक भाग को अपना मनपसंद आकार दें , कटा पास्ता और भिगोए हुए केसर से सजाएं तथा ठंडा कर पहले श्रीकृष्ण को भोग लगाएं फिर अपने लोगों को पेश करें।