July 28, 2008
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हिमालय में जाकर नहीं बल्कि अहंकार का नाश करके सन्यास का लक्ष्य पूरा होता है।
निश्चयपूर्वक विवेक कीजिए। विकासपूर्वक विस्तार कीजिए। जिज्ञासापूर्वक अनुसंधान कीजिए।
जीवन को नीरस और डरपोक बनाना आपको शोभा नहीं देता। आपको पता होना चाहिए कि आपमें सर्वशक्तिमान् सर्वज्ञ परमात्मा का निवास है।
संसार के पदार्थ सुन्दर होते हैं , लेकिन इनसे भी अधिक सुन्दर है मन और मन से भी अधिक सुन्दर है आत्मा।
July 27, 2008
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ख़ुदा के राज़ को, इन्सां का ज़हन, क्या समझे।
फ़लक कहां है, ज़मी क्या है, ज़िन्दगी क्यों है।।
रात भर बात तारों से होती रही।
दास्तां उनको अपनी सुनाते रहे।।
ज़िंदगी क्या है, एक बाजी है।
जीतना है, तो हारते रहिये।।
अजब ये मुहब्बत का दस्तूर है।
सताना, रुलाना, हंसाना कभी।।
सारी दुनिया से मुझे, कुछ भी मिले या न मिले।
मुझको तो बस तेरी नज़रों की इनायत चाहिए।।
July 26, 2008
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१—–अकेला रहना एकान्त नहीं , परन्तु मन को ख़्यालों से रहित करना सच्चा एकांत है।
२—–एक महापुरुष का वचन है कि मकोड़ी की भाँति नम्र बनो , जो पैरों से कुचली जाती है , लेकिन कुछ भी कहती नहीं। ततैये की भाँति कठोर न बनो , जो आकाश में उड़ता है परन्तु सबको पीड़ा देता है।
३—–जो द्वेष के कारण आपको गालीयाँ दे , उसे तुम दिल से दुआएँ दोगे तो आपमें विष को अमृत बनाने की शक्ति आ जाएगी।
४—-मूर्ख वे हैं , जो पीढ़ियाँ बताकर अपने को बड़े खानदान वाला मानते हैं लेकिन असली खानदानी वही है , जो गुणवान है।
५—–गुणवान व्यक्ति कभी अभिमानी नहीं होता। फल वाली डाली सदैव झुकी रहती है।
July 25, 2008
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छोटे बच्चे अबोध और चंचल होते हैं , इसलिये अक्सर गिरते-पड़ते रहते हैं। ऐसी स्थिति में चोटें लगनी स्वाभाविक हैं। परन्तु कई बार मामूली दुर्घटना भी खतरनाक रुप धारण कर लेती है। यदि हम माता-पिता कुछ सावधानियाँ बरतें तो बच्चे को हर संभव ख़तरे से बचाया जा सकता है।बच्चे के स्वभाव में उत्सुकता होती है, चीज़ों को देखने, पकड़ने और उसे मुँह में लेने की। कुछ समय पहले भारत में ज़्यादातर घर संयुक्त होते थे, यहां घर भी बड़े-बड़े थे और बच्चों को देखने के लिये अनुभवशील दादियाँ और ताइयां परिवार में रहती ही थी। बदलते समय में घर छोटे हो रहे हैं। दो कमरों में ही मनुष्य की पूरी ज़िदगी बीत जाती है। संयुक्त परिवारों का प्रचलन भी लगभग मिटता जा रहा है। स्त्रियाँ भी कार्य करने हेतू बाहर निकल रही हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल एक प्रमुख समास्या के रुप में उजागर हो रही है। जरुरत से ज़्यादा बच्चों को बाँधकर रखने के कारण भी बच्चे होने वाले ख़तरों से अन्जान रहते हैं। हम अपने बच्चों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करके उनके संभव खतरे को कम तो कर ही सकते हैं। आपातीय चिकित्सा हेतू अस्पताल एवं क्लिनिक पहँचने वाले घायल बच्चे मुख्यतः निम्न प्रकार की दुर्घटनाओं से ग्रसित होते हैं———-
बच्चे द्वारा किसी ठोस वस्तु को निगल लेना , किसी जहरीले पदार्थ को खा जाना , जल जाना , पानी में गिर कर डूबना , ऊँचाई से गिरना , मशीनों से संबंधित घटनाएँ , सड़क पर घटित दुर्घटनाएँ , जानवरों से छेड़छाड़
जब बच्चा २० महीनों का हो जाता है तो उसे हम संभावित खतरों से बचाव के संबंध में कुछ बातें सिख भी सकते हैं, जैसे गरम वस्तुओं को न छूना, नुकीली वस्तुओं से न खेलना इत्यादि।
बच्चे घर में खिलने वाले सबसे प्यारे फूल हैं, ये फूल सदा खिले ही रहें इस के लिये एक सुरक्षित वातावरण अति आवश्यक है
July 24, 2008
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तेरह तरह के गुलर का फल देने वाला अद्भुत वृक्ष प्रिटोरीया (दक्षिण अफ्रीका) के नाइसना जंगल में है।
रोम इटली में एक मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि उसमें आदमी की खाँसी ठीक कर देने की क्षमता है,जो उस इमारत में एक रात व्यतीत करें।
पागोनि अलि (आस्ट्रेलिया ) का इंसान सिर्फ़ सर्प का ही भोजन करता है।
उड़ने वाला मेंढक जो वृक्षों पर रहता है , अफ्रीका और यूरोप के देशों में पाया जाता है।
अमेरिका की आमेज़न नदी में करेंट पैदा करने वाली मछली पाई जाती है।
विमान से तेज़ उड़ने वाली मक्खी अफ्रीका में पाई जाती है।इसका नाम वोट फ्लाई है, इसे नेट भी कहते हैं।
July 24, 2008
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२कप मकई का आटा , २कप बारीक कटी हुई ताज़ी मेथी के पत्ते , बारीक कटा १प्याज़ , २हरी मिर्च कटी हुई , नमक स्वादानुसार , गरम पानी आटा गूँधने के लिये , घी या तेल
आटे को छान लीजिए। डंडी उतार कर मेथी को धओकर बारीक काट लीजिए। आटे में कटी मेथी , प्याज़ , हरीमिर्च और नमक मिलाएं। गुनगुने पानी की सहायता से आटा घूँध लें। पोलीथीन की सहायता से रोटी को बेलें। गरम तवे पर रोटी को दोनों तरफ से पकाएं, चाहें तो परांटे जैसा तल लें।
केवल चार व्यक्तियों के लिये
July 23, 2008
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रंगों को न पहचान पाना रंगांध कहलाता है। आँख की बहुत सी बीमारियाँ तथा शारीरिक रोग प्रत्यक्ष या परोक्ष में दृष्टि विकार पैदा करते हैं जिससे रंगांध होने की संभआवना रहती है। मोतियाबिंद , ग्लोकोमा रेटिनाइटिस पिकमेंटोसा, आप्टिक नर्व के रोग , मधुमेह , उच्च रक्तचाप तथा बहुत से स्नायु संबंधी रोगों में रंगांध होने की आशंका रहती है ऐसे रोगी जो बहुत समय से जोड़ों के दर्द , ह्रदय रोग , क्षय रोग , कोढ़ , उच्च रक्तचाप , गुरदे के रोग और मानसिक विकार से पीढ़ित होते हैं, रंगांध हो सकते है क्योंकि दवाओं का मरीज़ों के स्नायु तंतुओं पर कुप्रभाव पड़ता है।
July 23, 2008
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व्यक्ति =दो
आधा कप आटा , २बड़े चम्मच बेसन , आधा कप बारीक कटा हुआ पालक , १छोटा आलू- उबला हुआ , चौथाई छोटा चम्मच नमक , चुटकी भर अजवाइन , आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर काट लें। उबले हुए आलू को छील करके कद्दूकस करें। बेसन , आटा , नमक , पालक , आलू , अजवाइन और काली मिर्व को मिला लें।पानी के साथ गूँध लें। तवे पर रोटी बना लें।
July 22, 2008
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यह बीमारी सालमोनेला टायफी नामक जीवाणु के संक्रमण से उत्पन्न होती है। मियादी बुखा़र लगभग ४सप्ताह तक चलता है।
लक्षण—-
१= यह बुखार हर रोज़ धीरे-धीरे बढ़ता है।
२= भूख लगनी बन्द हो जाती है , पेट में दर्द होने लगता है।
३= सुस्ती व कमजो़री आती है, उल्टी महसूस होती है।
४= सिर दर्द होता है।
५= बड़ों में कब्ज़ तथा बच्चों में दस्त हो सकते हैं।
६= बदन पर गुलाबी रंग के दाने पड़ते हैं।
७=शरीर में तिल्ली बढ़ जाती है।
८= जिगर बढ़ जाता है।
९= नब्ज़ सुस्त पड़ने लगती है।
१०= वज़न लगातार घटने लगता है।
आँतों से रक्तस्त्राव हो सकता है।
११=आँतों के संक्रमण के बाद शरीर के हर अंग में संक्रमण हो सकता है और मस्तिष्क ज्वर, न्यूमोनिया, ब्रोंकाइटिस, पित्त की थैली का संक्रमण, गुर्दे में संक्रमण,इसमें से किसी भी रोग की जटिलता उत्पन्न हो सकती है।
१२= आँतों के जख्म या अल्सर के फटने से आपरेशन की स्थिती बन सकती है।
विकसित देशों में यह बीमारी कम होती जा रही है क्योंकि वहाँ जन स्वास्थ्य की सुविधाएँ हर रोज़ बेहतर होती जा रही हैं। इसके अलावा खान पान और सफा़ई पर वहाँ खास ध्यान दिया जाता है।
टायफायड बुखार एक जानलेवा बुखा़र है तथा यह एक गंभीर समस्या के रुप में आता है। अतः इलाज तुरंत और प्रभावी ढंग से कराएँ।
July 21, 2008
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उच्च रक्तचाप कभी बढ़ती उम्र का रोग हुआ करता था लेकिन अब ऐसा नहीं है।आज ३०वर्ष में भी रक्तचाप सामान्य से अधिक हो जाता है।युवाओं में ब्लड प्रेशर की समास्या का मुख्य कारण उनकी अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान।सामान्य रक्तदाब १२०-९० होना चाहियें। ऊपरीदाब (सिस्टोलिक ) निचला दाब (डायस्टोलिक ) कहा जाता है।आमतौर पर उच्च रक्तचाप का कोई लक्षण नहीं होता, अतः व्यक्ति को लम्बे समय तक इसका पता नहीं चलता। लेकिन यदि को चक्कर आयें, सिर दर्द हो, साँस में तक़लीफ़ हो , नींद न आए , शीथीलता रहे , कम मेहनत करने पर सांस फूले और नाक से खून गिरे इत्यादि तो मेरी आप सभी से प्रार्थना है कि किसी अच्छे डाक्टर को तुरंत दिखाए।
उच्च रक्ततचाप के कारण ————
१= चिंता , क्रोध , ईर्ष्या , भय आदि मानसिक विकारों का होना।
२= बार-बार या आवश्यकता से अधिक खाना।
३= मैदा से बने खाद्ध , चीनी , मसाले , तेल-घी अचार , मिठाईयां , मांस , चाय , सिगरेट व शराब आदि का सेवन।
४= नियमित खाने में रेशे , कच्चे फल और सलाद आदि का अभाव।
५= श्रमहीन जीवन, व्यायाम का अभाव।
६= पेट और पेशाब संबंधी पुरानी बीमारी।