सदा मुस्कराना और सबको प्यार करना
गुणी जनों का सम्मान पाना
बच्चों के दिल में रहना
सच्चे आलोचकों से स्वीकृति पाना
झूठे दोस्तों की दगाबाज़ी को सहना
ख़ूबसूरती को सराहना
दूसरों में ख़ूबियाँ तलाशना
किसी उम्मीद के बिना
दूसरोंके लिये ख़ुद को अर्पित करना
उत्साह के साथ हँसना और खेलना
और मस्ती भरे तराने गाना,
इस बात का एहसास कि आपकी ज़िंदगी ने व्यक्तियों का जीवन आसान बनाया
यही सच्ची सफलता है।
Archive for June, 2008
सच्ची सफलता
कुछ शायरी
१– लोग नाखूनों से बनाते हैं चट्टानों पर कुआँ।
और उम्मीद यह करते हैं कि पानी निकले।।
२– ऐसा लगता है हर इम्तेहाँ के लिये।
ज़िंदगी को हमारा पता याद है।।
३– इन्सान की फ़ितरत में कुदरत ने लचक दी है।
तुम जितना दबाओगे उतना ही वह उभरेगा।।
४– साँप जब तक आस्तीनों के न मारे जाएंगे।
हौंसला कितना भी हो , जंग हारे जाएंगे।।
५– मुश्किले हँसती हैं मेरी सादगी को देखकर।
मुश्किलों को देखकर, हर गाम पे हँसता हूँ मैं।।
भारत की भावात्मक एकता
सभी दिज संस्कृति के अनुकूल
एक हों रचैं राष्ट्र उत्थान
इसलिये नहीं कि करें, सशक्त निर्बलों को अपने में लीन-
इसलिये कि हों राष्ट्र हित हेतु समुन्नति पथ पर सब स्वाधीन।
जीवन
गतिशीलता जीवन है और गतिहीनता मृत्यु। गतिशील जीवन ही भविष्य में पल्लवित और पुष्पित होता हुआ संसार को सौरभमय बना देता है। चित्त की प्रफुल्लता से हमारा स्वास्थ्य भी सुन्दर रहता है।
अन्तर्राष्ट्रीय मादक एवं द्रव्य-निषेध दिवस
नशा——
मनुष्य नैराश्य के क्षणों में बोझ और दुख को भुलाने के लिये उन मादक द्रव्यों का सहारा लेता है जो उसे दुखों की स्मृति से दूर बहा ले जाते हैं। अनेक घर और परिवार इस भयवाह नशे से उजड़ गये हैं और कई युवक जीवन से ही हाथ धो बैठे हैं। नशे से ह्रदय , आमाश्य प्रभावित होते हैं। एक बार इस नशे की लत पड़ने पर वह निरन्तर इसमें गहरे धसता चला जाता है और इसकी मांग बढ़ती ही चली जाती है। इस दुष्प्रवृत्ति को रोकने के लिये सरकार और जनता दोनों का सक्रिय सहयोग ही सफल हो सकता है।
ज़िंदगी
ज़िंदगी में कभी हास है कभी रुदन
कभी सम्पदा है कभी विपदा
कभी संयोग है तो कभी वियोग
कभी सम्मान मिलता है तो कभी अपमान का भी सामना करना पड़ता है।
कभी पुरुस्कार मिलता है कभी तिरस्कार भी।
मनुष्य को दोनों स्थितियों में जीवन जीना है। आशा का सम्बल कभी नहीं छोड़ना चाहियें। दुख को चुनौती समझकर उसका सामना करना वीरता का प्रतीक है। जीवन का हर दिन एक त्यौहार है और हर रात बसंती रजनी (रात्रि)।
जीवन संदेश
ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे,
जो है जहाँ चुपचाप अपने आप से लड़ता रहे।
जो भी परिस्थितियाँ मिलें, काँटे चुभे कलियाँ खिले,
हारे नहीं इंसान, है संदेश जीवन का यही।।
प्रेम
राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित कविता ‘प्रेम’ से कुछ पंक्तियाँ—–
आकाश में, जल में, हवा में, विपिन में, क्या बाग में,
घर में, ह्रदय में, गांव में, तरु में, तथैव तड़ाग में,
है कौन सी वह शक्ति, जो है रहती एक सी सदा,
जो है जुदा करके मिलाती, मिलाकर करती जुदा ?
वह प्रेम है।
सत्य वचन
१– विद्धा वह अच्छी, जिसके पढ़ने से बैर द्वेष भूल जाएँ। जो विद्वान बैर द्वेष रखता है, यह जैसा पढ़ा, वैसा न पढ़ा।
२– जो व्यक्ति शत्रु से मित्र होकर मिलता है, व धूल से धन बना सकता है।
३– कुसंगी है कोयलों की तरह, यदि गर्म होंगे तो जलाएँगे और ठंडे होंगे तो हाथ और वस्त्र काले करेंगे।
४– राजा यदि लोभी है तो दरिद्र से दरिद्र है और दरिद्र यदि दिल का उदार है तो राजा से भी सुखी है।
५– लोभ आपदा की खाई है संतोष आनन्द का कोष।
प्रेम
प्रेम सच्चा अमृत है, जो मनुष्य के दिल को अमर आनन्द देता है।
जीवन का पौधा प्रेम के पानी से हरा-भरा रहता है।
दिल में प्रेम हो, फिर सहायक की क्या आवश्यकता ? प्रेम वह जादू है, जो चटपट में लाकर मंजिल पर पहुँचाए।
सब मस्तियों से प्रेम की मस्ती महान है। यह वह नशा है, जिसका नशा प्रलय तक भी नहीं उतरता।
मछली जैसे पानी के लिये तड़पती है , बीमार जैसे स्वास्थ्य के लिये उत्सुक रहता है , भूखा जैसे अन्न के लिये लालायित रहता है , प्यासा जैसे पानी के लिये तरसता है , वैसे परमात्मा के तरसने को कहा जाता है——- प्रेम।