सुविचार———-
१= निश्चय पूर्वक विवेक कीजिए।विकासपूर्वक विस्तार कीजिए।जिज्ञासा पूर्वक अनुसंधान कीजिए।
२= आपकी आँखों में करुणा , वाणी में माधुर्य , और हाथों में कोमलता होनी चाहिए।
३= अत्याचारों के समक्ष कभी नतमस्तक नहीं होना चाहिए।
४= भ्रष्टाचार व अन्य सामाजिक बुराईयों को कभी आश्रय न दें।
सुविचार———-
गणतंत्र दिवस(छब्बीस जनवरी)
छब्बीस जनवरी आकर कहती हर बार, संघर्षों से ही मिलता है जीने का अधिकार।।
स्वतंत्रता वरदान है और परतंत्रता अभिशाप।भारत देश को भी शताब्दियों तक पराधीनता का अभिशाप सहन करना पड़ा। भारत क्वतंत्र तो हो गया पर उसका कोई अपना संविधान नहीं था। सन१९५० में देश के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा नया संविधान बनने पर २६जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। गणतंत्र का अर्थ है सामुदायिक व्यवस्था।
आज संपूर्ण विश्व में हिंसा , द्वेश , प्रतिहिंसा , और अपहरण तथा शोषण की भावना नेण घर कर लिया है। हमारे देश के गणतंत्र ने इन दूषित एवं कुत्सित भावनाओं से पृथक रहकर अहिंसा , प्रेम , समानता और भाईचारे को ही अपनाया है। इसमें सन्देह नही कि इस समय हमारे गणतंत्र के अने क कठिनाईयां हैं ,किन्तु जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि हमारा राष्ट्र एक दिन विश्व में अवश्य अग्रणी होगा ।
शिवमंगल सिंह ‘सुमन ‘ने पिंजरे में बन्द पक्षी के माध्यम से पराधिनता के उत्पीड़न को प्रकट करते हुए कहा है———– नीड़ न दो चाहे टहनी का , आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।।
२६ जनवरी पर आप सभी को ढेर सारी बधाईयां।
मकर संक्रान्ति
मकर संक्रान्ति -भारतीय ज्योतिष के अनुसार सूर्य की बारह राशियाँ मानी गई हैं।जब सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है तब ‘मकर संक्रान्ति’ होती है। मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरायण और कर्क संक्रान्ति से सूर्यदक्षिणायन हो जाता है।उत्तरायण में दिन बड़ा होता है, रात छोटी और दक्षिणायन में रात बढ़ी और दिन छोटा होता है कहा जाता है कि इस दिन यशोदा जी ने कृष्ण के जन्म केलिए व्रत रखा था। यह प्रतिवर्ष १४ जनवरी को होती है।इस दिन गंगा- यमुना स्नान का बड़ा महत्व है। मकर संक्रान्ति के दिन खिचड़ी और तिल के बने लड्डू गरीब ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। महाराष्ट्र में विवाहित लड़किया ंइस दिन तेल , कपास , नमक आदि सौभाग्यवती स्त्रियों को देती हैं। बंगाल में भी स्नान और तिल दान की प्रथा है। गंगा सागर में इस दिन बड़ा भारी मेला लगता है। इस महीने में घी और कम्बल देने का विशेष महत्व है।
नव वर्ष के सुहाने अवसर पर चाकलेट की बरफी बनाइये——–
नव वर्ष के सुहाने अवसर पर चाकलेट की बरफी बनाइये——–
दो प्याले दूध पाउडर , एक प्याला दूध , आधा प्याला पिसी चीनी , दो बड़े चम्मच कोको पाउडर , दो बड़े चम्मच मक्खन , सजाने के लिए बादाम -पिस्ते।
दूध को पकने रख दें। जब आधा रह जाए तो आँच बन्द कर दें। अब इसमें चीनी, मक्खन व दूध पाउडर मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। तीन चौथाई मिश्रण सफैद रहने दें। एक चौथाई हिस्से में कोको पाउडर अच्छी तरह मिला दें। एक थाली में सफेद हिस्से को फैला दें।इसके ऊपर चाकलेट वाला हिस्सा फैला दें। ठंडा होने के लिए फ्रिज में रखें , टुकढ़े काटें। पिस्ते-बादाम से सजाकर पेश करें।
क्रिसमस के अवसर परएक मज़ेदार राक केक————
क्रिसमस के अवसर परएक मज़ेदार राक केक————
डेढ़ प्याला मैदा , दो अंडे , आधा प्याला कोको पाउडर , एक छोटा चम्मच खाने वाला सोडा , एक छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर , आधा प्याला तेल , एक प्याला चीनी , एक प्याला दही।
आइसिंग के लिए= चौथाई प्याला कोको पाउडर , एक प्याला आइसिंग शुगर , एक बड़ा चम्मच मिल्क पाउडर , चौथाई प्याला मक्खन।
मैदा ,कोको पाउडर , सोडा , व बेकिंग पाउडर मिलाकर छान लें। अंडा , चीनी व तेल मिलाकर फेंटे। इसमें मैदा मिश्रण व दही डालकर १०-१२ मिनट तक खूब फेंटे और केक टिन में तेल डालकर यह मिश्रण डाल दें। ओवन में २०० डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर केक बेक करें। २५-३० मिनट लगेंगे। सलाई डालकर देख लें कि केक पका या नहीं।
आइसिंग शुगर , मक्खन , कोको पाउडर व मिल्क पाउडर मिलाकर ठंडा होने के लिए फ्रिज में रखें।
केक ठंडा होने पर आइसिंग करें।
बड़ा दिन (क्रिसमस) आप सभी को शुभ हो।
नववर्ष २०१२ में लोगों का स्वागत घर में तैयार की गई काजू की बरफ़ी ख़िलाकर कीजिए—————
काजू बरफ़ी= = २५० ग्राम काजू और २५० ग्राम चीनी।
काजू को २० मिनट तक पानी में भिगोने के बाद पीस लें। कढ़ाही गर्म करके उसमें पिसे काजू और चीनी मिलाकर धीमी आँच पर २० मिनट तक भूनें। एक ट्रे में हल्का सा घी लगाएं।तैयार पेस्ट में से मोटी सी लोई लेकर ट्रे के ऊपर बेलन की सहायता से ६ मिलीमीटर मोटा बेल लें।ऊपर से चाँदी का वर्क़ लगाकर बरफ़ी के आकार में काट लें।प्लेट में निकालकर सर्व करें और घर पर आने वाले महमानों को नववर्ष की शुभकामनाएं दें।
जय जवान जय किसान
कथन बड़े सारगर्भित तथा अनुभूतिपूर्ण होते हैं। ये एक प्रेरक के समान होते हैं।इनमें जीवन की दिशा को बदल देने कि शक्ति होती है। ये हमारी सुप्त आत्मा को जगाते हैं। ‘स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है,’ भारत छोड़ो’, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ , ‘जय हिन्द’ आदि ऐसे कथन हैंजो हमारे देश भक्तों के मुख से निके। धीरे-धीरे इनकी लोकप्रियता बढ़ती गई और कालान्तर में उन्होंने नारों का रुप ले लिया। “जय जवान जय किसान”का नारा भारत के द्वितीय प्रधान मंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था।शास्त्री जी की धारणा थीकि देश की रक्षाएवं पोषण का उत्तरदायित्व जवान और किसान के ऊपर है। सारा देश इनके ऊपर निर्भर करता है। जब देश के जवान मातृभूमि की रक्षा के लिए पाकिस्तान की सेना से टक्कर ले रहे थे तब शास्त्री जी के मुख से यह नारा प्रस्फुटित हुआ।जय जान सेअभिप्राय भारत के उस सैनिक से हैजो देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात हैं। हनमें त्याग एवं तपसया की अदभुत क्षमता होती है————-
जग भूले, पर मुझे एक , बस, सेवा-धर्म निभाना है। जिसकी यह देह उसी में इसे मिट जाना है।।
जवान बन्दूक लेकर देश की रक्षा करता है तो किसान कन्धे पर हल सजाकर अपने खेतों की ओर बढ़ता है। दोंनो कार्य जटिल है। किसान कठोर साधना द्वारा भूख और अकाल का सामना करता है। किसान का जीवन सादा होता है। किसानों की घोषणा कितनी विश्वास पूर्ण है————
हमारे हाथ में हल है, हमारे हाथ में बल है , कि हम बंजर को तोड़ेंगे।
बिना तोड़े न छोड़ंगे।।
कड़ी धरती इधरभी है, कड़ी धरती उधर भी है , कि हम उनको विदारेंगे , नचूकेंगे न चूकेंगे।
जवानों का यह कर्तव्य है कि वे किसानों के खेतों की रक्षा करने के लिए शत्रु से डटकर लोहा ले। खेत की रक्षा जीवन की रक्षा है।
किसान दिवस और डा० राजेन्द्र प्रसाद जयन्ती ३-१२-११को है ।इसकी सभी को शुभकामना।
जनमानस की अमूल्य निधि–पंडित जवाहर लाल नेहरु
पं० नेहरु का जन्म प्रयाग में १४ नवम्बर १८८९ में हुआ था। वे बुद्धिवादी विधि विशेषज्ञ थे। भावुकता और कल्पना उनसे बहुत दूर थी। वे अपने साहस औ बुद्धिबल से अडिग विशवासी थे। भारतवर्ष केप्रमुख कानून विशेषज्ञों में उनकी गणना थी। सात वर्ष तक विलायत में शिक्षा ग्रहण करने के बाद १९१२में बैरिस्ट्री पास करके जवाहर लाल भारतवर्ष लौटे।विलायत से लौटकर जवाहर लाल जी भी देश की राजनीति में भाग लेने लगे। जब देश में असहयोग आन्दोलन शुरु हुआ, पं नेहरु बड़े प्रसन्न हो उठे, उन्होंने इसमें भाग लिया। १९३६ और ३७ में क्रमशः लख़नऊ और फैज़पुर कांग्रेस अधिवेशनों में उन्होंने अध्यक्ष पद सुशोभित किया। पं नेहरु अद्वितीय राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक उच्च कोटि के लेखक भी थे।पं नेहरु एक अन्तर्राष्ट्रीय महापुरुष थे। नेहरु जी एशिया के प्रेरणा स्त्रोत थे।उनके जीवन के प्रमुख साथी थे अभय और साहस। निरन्तर तीस वर्षोतक वे ब्रिटिश शासन से जूझते रहे भारत को मुक्ति प्रदान कराने के लिए। देश का बच्चा -बच्चा भी जवाहर ला ल की जय बोलने लगा था। जवाहर लाल जी को बच्चों से बेहद प्यार था। उनका जन्मदिन ‘बाल-दिवस’के रुप में मनाया जाता है। भारत का यहन ह्रदय सम्राट और अप्रतिम नेता अपनी कीर्ती और गौरव के शिखर पर पहुँचकर २७ मई१९६४को अपनी इस नश्वर काया को छोड़कर सदा सर्वदा के लिएअमर हो गया। नेहरु जैसा महाप्राण व्यक्ति किसी भी देश में सहस्त्रों वर्षों के बाद ही उत्पन्न हुआ करता है।